जाने माने वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग का हुआ निधन….

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया है। वह 76 वर्ष के थे। ब्रिटिश प्रेस एसोसिएशन ने उनके परिवार के प्रवक्ता के हवाले से आज यह जानकारी दी। हॉकिंग एक ऐसी बीमारी से पीड़ित थे, जिसके चलते उनके शरीर के कई हिस्सों पर लकवा मार गया था।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और विज्ञान के क्षेत्र में नई खोज जारी रखी। हॉकिंग ने ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में अहम भूमिका निभाई थी। हॉकिंग के पास 12 मानद डिग्रियां थीं और अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया गया था। यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज में गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफ़ेसर रहे स्टीफऩ हॉकिंग की गिनती आईंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतकशास्त्रियों में होती थी।

रोचक की बात है कि कम क्लास लेने और किताबी कीड़ा बन कर न पढ़ने के बावजूद भी उनका दिमाग तेज था। कॉलेज में हॉकिंग ने जब अपनी थीसिस जमा की, जो प्रथम श्रेणी और द्वीतिय श्रेणी के बीच की ग्रेड में रखा गया। ऐसे में उन्हें एक मौखिक परीक्षा से गुजरना पड़ा। तब उन्होंने शिक्षकों से कहा था, “अगर आप मुझे प्रथम श्रेणी देंगे तो मैं कैब्रिज जाऊंगा। अगर द्वीतिय श्रेणी में रखेंगे तो मैं यहीं रह जाऊंगा। ऐसे में मैं आपसे पहली श्रेणी की उम्मीद करता हूं।”

1962 में उन्होंने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में अपना नाम लिखाया, जहां वह भौतिक विज्ञानी डेनिस स्कीमा और नामी खगोल विज्ञानी फ्रेड हॉयल सरीखे नामों के अंतर्गत थे। यहीं, उनकी रुचि ब्लैक होल्स और विलक्षणता के तत्कालीन प्रारंभिक अध्ययन में दिखने लगी थी। कॉस्मोलॉजी में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने के बाद वह कैम्ब्रिज में ही रुके।

यहां उन्होंने ब्रह्मांड के ढांचे से जुड़े जरूरी प्रश्नों को समझने का प्रयास किया। कैम्ब्रिज में हॉकिंग वाइल्ड से मिले थे, जो लंदन के वेस्टफील्ड कॉलेज में आधुनिक भाषाओं की पढ़ाई कर रही थी। मगर दोनों की डेटिंग से पहले ही हॉकिंग को आइस स्केटिंग बीमारी हो गए। वह डॉक्टर के पास गए, जहां उन्होंने आशंका जताई कि हॉकिंग के पास कम वक्त बचा है।

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