शनि जयंती पर कर लें सिर्फ ये काम…..

ऐसे लोगों के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास है। इस बार मंगलवार को ही पड़ रही है ज्य़ेष्ठ अमावस्या और इसी दिन को पड़ता शनि जयंती। यानी मंगलवार को जो जातक सूर्य पूत्र शनि की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करने में कामयाब हो जाता है कि निःसंदेह उन्हें उसका फल मिलेगा।

माना जाता है कि शनि देव के प्रसन्न रहने पर व्यक्ति को अपनी मुसीबतों से मुक्ति मिल जाती है। उसकी कुंडली में शनि दोष होने पर भी उसके दुष्प्रभाव नही दिखाई देते है। शनि देव को प्रसन्न करने में दान का खास महत्व है। काशी में बाबा विश्वनाथ दरबार से ठीक पहले है शनि देव का मंदिर।

न्याय के देवता शनि की आज जयंती हैं। सालों बाद शनि जयंती मंगलवार के दिन पड़ रही है, जो खुद में बेहद महत्वपूर्ण है। खास तौर पर जिनकी जन्म कुंडली में शनि की महादशा ठीक नहीं चल रही हो।

ऐसे मनाएं शनि जयंती : शनि की महादशा से परेशान जातक को शनि जयंती पर धूम धाम से पूजा करनी चाहिए। संकल्प करना चाहिए कि किसी भी सूरत में शनि देव को विस्मृत नहीं करेंगे, सदैव उनकी सेवा में लगे रहेंगे। ऐसा करने की सूरत में प्रतिकूल परिस्थिति में भी सूर्य पुत्र साथ देंगे। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि जयंती वाली अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व उठें सर्वप्रथम शनि देव को जन्मदिन की शुभकामना दें और उनसे वंदना करे की आज का दिन वे आपका उनकी सेवा में लगा कर रखेंगे। फिर दैनिक क्र्या से निवृत्त हो कर ईष्ट देवों, माता पिता गुरु का आशीष ग्रहण करें।

 

संभव हो तो काला वस्त्र धारण करें। सूर्य सहित सभी नवग्रहों का नमन करे और अपने मंदिर में गणेश जी के साथ अपने आराध्य देव का पंचोपचार पूजन करें। पंचोपचार में स्नान करना, वस्त्र पहनाना, चंदन और पुष्प चढ़ाकर धुप दीप प्रज्ज्वलित करना आदि शामिल है। इसके बाद शनि पूजन और दान के लिए काले तिल, उड़द डाल, गुलाब जामुन, काला या नीला कपडा, गुड, नीले पुष्प, सरसों का तेल, दीपक, काजल आदि को लेकर शनि मंदिर जाएं। विधिवत पूजा करें, शनि चालीसा, आरती और शनि के 108 नामो का जप करें। शनि मंदिर के बाहर जरुरतमंदो को दान करें। काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी, काले सांड को गुड, कौवे को गुलाब जामुन खिलाएं। संभव हो तो शनि का व्रत करे और शाम को सूर्यास्त के बाद व्रत खोलें। खाने में तिल और तेल से बनी चीजें जरुर खाएं।

भोजन उपरांत हनुमानजी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम और 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें। काले कपडे, जामुन, काली उडद, तिल, लोहा, तेल, आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान करें। शनि का पूजन करते समय उनसे कभी आंख नहीं मिलाना चाहिए क्योंकि शनि की वक्र दृष्टि है। सिर झुकाकर नमन करके उनकी पूजा करें, चूंकि शनि न्याय के देवता हैं इसलिए यदि आपके कर्म खराब होंगे तो वे आपको दंड देंगे लेकिन यदि आपके कर्म अच्छे हैं तो आपको पुरस्कृत भी करेंगे।इन बातों का रखें ध्यान

-शनि देव की पूजा करने के दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करना चाहिए।
-शनिमंदिर के साथ-साथ हनुमान जी के दर्शन भी जरूर करने चाहिए।
-शनि जयंती या शनि पूजा के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
-इस दिन यात्रा न करें।
-जरूरतमंद गरीब व्यक्ति को तेल में बने खाद्य पदार्थों का सेवन करवाएं।
-गाय और कुत्तों को भी तेल में बने पदार्थ खिलाएं।
-बुजुर्गों व जरुरतमंद की सेवा और सहायता करें।
-सूर्यदेव की पूजा इस दिन न करें तो अच्छा है।
-शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर को देखते समय उनकी आंखो में नहीं देखें।

 

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