शनि प्रदोष व्रत विधि-विधान से पूजन करना आवश्यक….

शनि प्रदोष व्रत का विधि-विधान से पूजन करना आवश्यक है। प्रात:काल उठकर नित्य क्रम से निवृत हो स्नान कर शिव जी का पूजन करें। पूरे दिन शनि मंत्र का जप करें। शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4:30 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच ही करें। 

शाम को पुन: स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर लें। पूजा स्थल को शुद्ध कर लें। ईशान कोण की दिशा में किसी एकान्त स्थल को पूजा करने के लिये प्रयोग करना विशेष शुभ रहता है।

उपाय

  • प्रदोष व्रत की आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग करें।
  • उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर व शनि देव का पूजन करें।
  • पूरे दिन शनि मंत्र का जाप करें।
  • व्रत की पूर्व रात्रि में जागरण व कीर्तन करें।
  • पूजन के बाद हवन व शनि आरती करें।
  • ब्रह्माणों को भोजन कराएं।
  • दान-पुण्य जरूर करें।
  • अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए व्रत करें।

पूजन सामग्री 
धूप, दीप, घी, सफेद पुष्प, आंकड़े का फूल, चंदन, सफेद वस्त्र, सफेद फूलों की माला, जल से भरा हुआ कलश, सफेद मिठाइयां, कपूर, आरती के लिये थाली, बेल-पत्र, धतुरा, हवन सामग्री, आम की लकड़ी।

शनि देव मान, सम्मान और न्याय के देवता माने जाते हैं। शनि देव की कुदृष्टि जीवन में ढेरों मुसीबतें ला देती हैं। एेसे में जरूरी है कि शनि देव को प्रसन्न रखा जाए। शनि प्रदोष पर किए गए व्रत व पूजन से न सिर्फ शनि देव प्रसन्न होंगे बल्कि संतान सुख भी प्रदान करेंगे।

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