भगवान शिव से पाएं जीवनसाथी की समृद्धि का वर-शुक्र प्रदोष

शुक्रवार दिनांक 13.04.18 को वैसाख कृष्ण त्रयोदशी के उपलक्ष्य में शुक्र प्रदोष पर्व मनाया जाएगा। हर माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि परमेश्वर शिव को समर्पित है। त्रयोदशी सभी प्रकार के दोषों का शमन करती है इसी कारण इसे प्रदोष कहते हैं। 

 

इसे भी पढ़ें:-

  सर्वप्रथम प्रदोष का ज्ञान वेदव्यास जी ने महर्षि सूत को बताया व गंगा तट पर सूतजी ने सौनकादि ऋषियों को प्रदोष का ज्ञान दिया था। प्रदोष का पूजन वार के अनुसार करने का शास्त्रों में विधान है। शुक्र प्रदोष के व्रत पूजन और उपाय से सभी सुखों की प्राप्ति होती है तथा अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है महर्षि सूत के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत करने से महादेव से जीवनसाथी की समृद्धि का वर मिलता है। जीवन में ऐश्वर्य प्राप्त होता है, व दांपत्य सुख में आ रही कमी दूर होती है।

  पूजन विधि: 

संध्या काल में शिवालय जाकर शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन धूप करें, गुलाबी फूल चढ़ाएं, गुलाल चढ़ाएं, इत्र चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र से 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी सुहागन को भेंट करें।

 

पूजन मुहूर्त: 
शाम 18:45 से रात 20:15 तक।

पूजन मंत्र: 
क्लीं काममूर्तये नमः शिवाय क्लीं॥ 

 

उपाय

  • ऐश्वर्यवान जीवन हेतु शिवालय में सुगंधित तेल के 13 दीपक जलाएं।
  • अखंड सौभाग्य हेतु शिवालय में इत्र मिले गौघृत का दीपदान करें।
  • सर्व सुखों की प्राप्ति हेतु मौली में पिरोए 13 गुलाब के फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
Facebook Comments