Inspiration : जेल में लिखी नावेल, बनी फिल्म तो पहुंची सीधा ऑस्कर

पुलिस ने 13 दिन तक किया था जेल में टॉर्चर, छूटा तो लिखी नॉवेल; उस पर बनी मूवी अब ऑस्कर में

तमिल फिल्म ‘विसरनाई’ भारत की ओर से ऑस्कर जाएगी। लॉस एंजिलिस में 89वें एकेडमी अवॉर्ड में विसरनाई फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में दिखाई जाएगी। विसरनाई (पूछताछ) फिल्म का ज्यादातर हिस्सा कोयम्बटूर के ऑटो ड्राइवर एम. चंद्रकुमार के नॉवेल ‘लॉक अप’ पर बेस्ड है। उन्हें आंध्र प्रदेश पुलिस ने 13 दिनों तक कस्टडी में टॉर्चर किया था। साढ़े पांच माह जेल में रहने के बाद कुमार 1984 में रिहा हुए।

– 2006 में इस नॉवेल को बेस्ट डॉक्युमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स का अवॉर्ड मिला था। विसरनाई के निर्देशक वेत्रीमारन और प्रोड्यूसर धनुष हैं। 2015 के नेशनल फिल्म अवॉर्ड में ‘विसरनाई’ को बेस्ट तमिल फिल्म समेत 3 अवॉर्ड्स मिले थे। यह लगातार दूसरा साल है जब हिंदी फिल्म को ऑस्कर के लिए नहीं भेजा गया। इससे पहले पिछले साल मराठी फिल्म ‘कोर्ट’ को भेजा था।

– 30 जून 1962 को एम. चंद्रकुमार के जन्म के बाद उनके माता-पिता गांव से जमीन बेचकर कोयम्बटूर आ गए। चंद्रकुमार के मुताबिक मैं बचपन में जिद्दी था।

– वह कहते हैं कि मैंने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और परिवार से झगड़े के बाद मैं घर से भाग गया। कई दिनों तक चेन्नई, मदुरै और तूतीकोरिन घूमता रहा।

– ”अपना गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम किए। कई बार रात में बस स्टैंड और फुटपाथ पर सो जाता था। बंजारे की तरह जिंदगी बिता रहा था। इसके बाद आंध्र प्रदेश के हैदराबाद चला गया।”

– ”वहां गुंटूर से 24 किमी दूर एक गांव में होटल में काम मिला। मैं अपनी उम्र के 2-3 दोस्तों के साथ रहता था वे भी मेरी ही तरह छोटा-मोटा काम करते थे।”

1983 में पुलिस ने शक के आधार पर किया था गिरफ्तार

– ”बात 1983 की है जब मुझे तीन साथियों के साथ पुलिस ने शक के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। मेरे तीनों साथी अल्पसंख्यक समुदाय से थे।”

– ”पुलिस ने पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया और अत्याचार करने लगे। हमें मार्च की गर्मी में छोटे-छोटे कमरों में रखा जाता था और पुलिस जब चाहती जानवरों की तरह मारती थी।”

– ”यह सिलसिला 13 दिनों तक चलता रहा। कुमार ने कहा कि पुलिस तब तक मारती रही जबतक हमने गुनाह कबूल नहीं किया।”

– ”हम भी यही सोच रहे थे कि गुनाह कबूल कर लिया जाए ताकि पुलिस की बेरहमी से बचा जा सके। इसके बाद साढ़े पांच माह की सजा के बाद 1984 में जेल से रिहा किया गया। फिर वापस कोयम्बटूर लौट आया।”

जेल में बिताए साढ़े पांच महीनों पर लिख रहे हैं नॉवेल ‘लॉक अप-2’

– कोयम्बटूर के ऑटो रिक्शा ड्राइवर 54 साल के एम चंद्रकुमार ऑटो चंद्रन के रूप में फेमस हैं। वे 6 किताबें लिख चुके हैं। कुमार अपने गुंटुर जेल के अनुभव पर ‘लॉक अप-2’ नॉवेल लिख रहे हैं।

– इसके अलावा रेप विक्टिम की कहानी पर आधारित कुमार के नॉवेल ‘वेप्पामात्रा वेल्लोलियाल’ पर भी फिल्म बन रही है।

 

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