माता के मंदिर के इतिहास से आज भी अनजान है हैरान, कहा- नहीं देखा चमत्कार

भारत में ऐसे बहुत से मंदिर है, जहां जाने पर व्यक्ति को एक अजीब सी शांति का अनुभव होता है. इन मंदिरों में कुछ मंदिर ऐसे भी है, जो अपनी अनोखी विशेषता के कारण वैज्ञानिकों को अपनी तरफ आकर्षित करते है. ऐसा ही एक मंदिर अल्मोड़ा में स्थित है, जिसे कसारदेवी मंदिर के नाम से जाना जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मंदिर में कोई चुम्बकीय शक्ति है, जो इन स्थानों को चार्ज करती है. इसी कारण से वैज्ञानिक इस चुम्बकीय शक्ति को जानने के लिए शोध कर रहे है.

इस मंदिर के विषय में डॉ. अजय रावत का कहना है कि कसारदेवी मंदिर के आस-पास समस्त क्षेत्र, वैन एलेन बेल्ट है, जहां भूमि के अंदर एक विशाल भू-चुम्बकीय पिंड स्थित है. इस पिंड पर विद्युतीय चार्ज कणों की एक परत चढ़ी है, जिसे रेडिएशन भी कहते है.

इस बेल्ट के रहस्य को जानने के लिए नासा के वैज्ञानिक आज भी इसका अध्ययन कर रहें है. इस अध्ययन में वैज्ञानिकों द्वारा इस बात पर भी शोध किया जा रहा है कि इस चुम्बकीय पिंड का व्यक्ति के मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है? अब तक के अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि कसारदेवी मंदिर के समान अन्य दो मंदिर भी है.

जिनमे से एक दक्षिण अमेरिका के पेरू में माचू-पिच्चू में स्थित है, और दूसरा इंग्लैंड के स्टोन हेंग में इन तीनों मंदिरों में कई समानताएं है. इन सभी मंदिरों में विशेष चुम्बकीय शक्ति पुंज मौजूद है, जो इस स्थान को चार्ज करता है. कसारदेवी मंदिर के आस-पास के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को पाषाण काल के अवशेष मिले है. अपनी एक अद्भुद क्षमता के कारण विदेश में भी यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है.

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