देश में नए राजनीतिक गठजोड़ की सुगबुगाहट

लोकसभा के चुनाव जल्दी होने की चर्चाओं के बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने तीसरे मोर्चे के विचार को उछाल दिया है। मोर्चे की रूपरेखा तैयार करने में जुटे चंद्रशेखर ने ऐलान किया कि देश में राजनीतिक बदलाव की सख्त जरूरत है और इसके लिए जिस भी औजार की जरूरत होगी, वो इस्तेमाल किया जाएगा। केसीआर ने साफ किया कि नया राजनीतिक गठजोड़, कांग्रेस और भाजपा को साथ लिए बिना खड़ा किया जाएगा। चंद्रशेखर राव ने कांग्रेस और भाजपा मुक्त भारत का नारा देकर नए राजनीतिक गठजोड़ को हवा दी है। केसीआर ने खुलासा किया है कि इस गठजोड़ के लिए उनकी बातचीत चल रही है।

नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के कामकाज को खारिज करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा कि राजनीतिक बदलाव की सख्त जरूरत है और इसकी कोशिश की जा रही है। केसीआर ने कहा है कि वो थर्ड फ्रंट भी हो सकता है या कुछ भी हो सकता है, लेकिन देश में राजनीतिक बदलाव लाना अब वक्त की जरूरत है।

राव ने कहा कि देश में सिर्फ 6 साल गठबंधन सरकार रही है। 64 साल तक कांग्रेस या भाजपा ने शासन किया है लेकिन नतीजा क्या हुआ? नक्सली समस्या है, दलित असंतोष है। 70 साल बाद भी देश में पीने का पानी नहीं है। तमिलनाडु में 69 फीसदी आरक्षण है लेकिन जब हम आरक्षण की सीमा बढ़ाने और 9वीं अनुसूची में शामिल करने की बात करते हैं तो मना मना कर दिया जाता है। यह सब नहीं चलेगा। कौन होगा तीसरे मोर्चे का नेता हालांकि तीसरे मोर्चे की अगुवाई के सवाल को केसीआर टाल गए। उन्होंने कहा कि वक्त के साथ इस मोर्चे का नेता भी उभरकर सामने आ जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि अगर देश को उनकी सेवाओं की जरूरत होगी, तो वो अपनी सेवाएं देने के लिए हमेशा तैयार हैं।

केसीआर ने ये साफ नहीं किया कि प्रस्तावित राजनीतिक मोर्चे में कौन कौन से दल शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत चल रही है लेकिन प्रस्तावित मोर्चे में कांग्रेस और भाजपा के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सौ प्रतिशत में खुलकर कह रहा हूं कि इस मोर्चे में कांग्रेस और भाजपा के लिए कोई जगह नहीं होगी। ये मोर्चा माइनस कांग्रेस और माइनस भाजपा होगा। त्रिपुरा और नागालैंड में भाजपा की जीत के साथ पार्टी के बढ़ते जनाधार को लेकर तमाम क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में चिंता बढ़ गई है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के थर्ड फ्रंट के कोशिशों को इसी के जवाब के रूप में देखा जा रहा है लेकिन सवाल यह है कि अगर तीसरे मोर्चे जैसा कोई स्वरूप तैयार होता है, तो इसमें शामिल होने वाली पार्टियां क्या भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगी। अगर नहीं, तो फिर इसकी वजह से वोट बंटने पर फायदा किसे होगा, ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है।

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