आखिर एक लड़की सेक्स वर्कर क्यों बन जाती हैं जानियें….

आखिर एक लड़की सेक्स वर्कर क्यों बन जाती हैं। सेक्स वर्कर बनने के बाद लड़की की जिंदगी किसी नर्क जैसी हो जाती है।

तब मैं कुल 8 बरस की हुआ करती। अम्मी के साथ एक मौलवी के पास जाती। वो मुझे अरबी सिखाया करता था। मां के साथ जाना मुझे बहुत अच्छा लगता। हम रास्तेभर बातें करते जाते। एक दिन अम्मी बुखार में पड़ी थी। मैंने उसे छोड़कर जाने से मना कर दिया। अम्मी मुझे कुरान पढ़ता देखने के लिए इतनी उतावली थी कि बीमारी में भी मेरे साथ चलने लगी। मैं आखिरकार अकेली ही मौलवी के पास चली गई।

फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि मैं डर गई। पढ़ाते हुए वो एकाएक मेरा हाथ सहलाने लगा। उसकी पकड़ मजबूत होती जा रही थी। मैं छोटी थी लेकिन बड़ी गुस्सेवर। झटके से उठी और घर लौटने के बाद ही रुकी।

अम्मी से बिना कुछ कहे मैं सीधे नलके पर पहुंची और हाथ धोना शुरू कर दिया। मैं रोती ही जा रही थी। अम्मी ने सब हाल जानने के बाद अपनी बेटी को कुरान पढ़ते देखने का ख्वाब देखना बंद कर दिया। उसने कहा कि अब कभी ऐसा नहीं होगा। हमने अब्बू को भी इस बात की कोई खबर नहीं होने दी।

 

मौलवी की छुअन से बौखलाकर घंटों हाथ धोने वाली ये लड़की अब सेक्स वर्कर है। ये बदकिस्मती नहीं तो और क्या है वरना क्यों एक दिन दूसरे गांव जाते हुए मैं रेलवे स्टेशन पर अपने अम्मी-अब्बू से बिछड़ जाती। हाथ छोड़कर स्टेशन से बाहर निकली तो कभी उनसे नहीं मिल सकी। घंटों मुझे उनका ख्याल भी नहीं आया। गांव की बच्ची थी, पहली बार शहर की रौनक देखने का मौका मिला था। भूख लगने पर अम्मी याद आई। मैं उन्हें खोजने हुए रोने लगी लेकिन शहर की भीड़ में किसी को एक बच्ची का धूल से सना, रोता हुआ चेहरा नहीं दिखा। आखिरकार एक कुली को मुझपर तरस आ गया। वो मेरे साथ देर शाम तक यहां-वहां अम्मी-अब्बू को खोजता रहा। रात मैं उसके घर रही।

जब कुछ दिनों तक मेरे घरवालों का पता नहीं चला तो मुझे एक कुली ने अपने घर में पनाह दे दी। कुली काफी नेक दिल था लेकिन उसका खुद का कुनबा बहुत बड़ा था और कमाई थोड़ी। कुली की पत्नी को एक बाहरी लड़की का खाना अखरता था। मैं दिनभर काम में हाथ बंटाती ताकि मेरी रोटियां बोझ न बनें लेकिन एक शाम उसने मुझे अपने भाई के हवाले कर दिया। ये शाम उसकी दी सारी रोटियों का हिसाब थी। उसने मुझे कोठे पर बेच दिया था।

पहले दिन मेरे कमरे में एक ‘खास’ क्लाइंट भेजा गया। मुझे अब तक किसी ने नहीं छुआ था और वर्जिनिटी तोड़ना उसकी मर्दानगी को और बढ़ाता। मैं शेरनी की तरह लड़ी। वो तगड़ा था लेकिन मेरे इरादे कहीं ज्यादा मजबूत थे। अगली सुबह कोठा मालकिन ने बुरी तरह से मेरी पिटाई की। मुझे कमरे में बंद कर दिया गया- बगैर कपड़ों के। अगले तीन दिन बिना कपड़ों और बिना खाने के बीते। मैं प्यास से तड़पते हुए सोच रही थी कि कितने दिन पानी न पीना मुझे मौत के करीब ले जाएगा।

चौथे दिन दरवाजा खुला। मुझे खाने को दिया गया लेकिन कपड़े नहीं लौटाए गए। फिर एक क्लाइंट आया। उसके बाद दूसरा। मैंने गिनती छोड़ दी।

 

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