अच्छी सोचे लोगों के जीवन में कामयाबी की राह बना जाती हैं ….

ऐसा कहा जाता हैं “जैसी सोच,वैसी तरक्की” . इसका मतलब होता हैं कि मनुष्य की सोच ही उसके भविष्य का निर्माण करती हैं. आइये जानते हैं इस बात को यथार्थ करते हुए सफलता की एक कहानी के बारे में

एक गाँव में खेल के मैदान के बाहर एक गुब्बारे वाला साईकिल पर ढ़ेर सारे रंग-बिरंगे गुब्बारे बांधकर बेचता था. वह गुब्बारे वाला रोज सुबह कॉलोनी के नुक्कड़ पर अपनी साइकिल लगा कर गुब्बारे बेचता और रात होने पर साइकिल लेकर घर चला जाता था. मैदान के पास ही एक घर में एक छोटा बच्चा रहता था, वो रोज़ गुब्बारे वाले को देखता रहता था.

 

गुब्बारे वाले के पास हरे, गुलाबी, नीले, सफेद,लाल, पीले और काले रंग के बहुत सारे गुब्बारे थे. वह गुब्बारे वाला  गुब्बारों की बिक्री कम होने  पर अपनी सायकिल से एक गुब्बारा निकलकर हवा में उड़ा देता था जिससे उड़ते हुए गुब्बारे को देखकर फिर से ढेर सारे बच्चे उसके पास पहुंच जाते थे और उसकी बिक्री हो जाती थी.

 

वह रोज़ यह तरीका अपनाता और उसे यह करते हुए वह छोटा बच्चा रोज़ देखता था . एक दिन जब गुब्बारे वाला गुब्बारे फुला-फुलाकर साइकिल में बांध रहा था तभी वह बच्चा उसके पास गया और एकटक उसे देखने लगा. गुब्बारे वाला मग्न होकर अपना काम कर रहा था. गुब्बारे वाले ने उसी समय एक गुब्बारा निकला और हवा में उड़ा दिया. उसके बाद बहुत सारे बच्चों ने उसे चारो और से घेर किया और कहने लगे- अंकल वो लाल वाला गुब्बारा मुझे दे दीजिए, तो कोई गुलाबी वाला गुब्बारा मांग रहा था.

 

भीड़ के खत्म होने पर उस छोटे से बच्चे ने बड़ी उत्सुकता से पूछा – “अंकल अगर आप काला वाला गुब्बारा छोड़ेंगे तो क्या वो भी ऊपर जाएगा?” . उसकी मासूमियत को देखकर गुब्बारेवाले ने उसे गॉड में उठाया और बोला, हां बिलकुल ऊपर जाएगा. आगे समझते हुए उसने कहा- जरूरी नहीं हैं कि कोई वस्तु किस रंग की हैं. वह उसके आतंरिक गुणों के कारण सबसे ऊपर उठता हैं और अपना स्थान बनता हैं. ठीक उसी प्रकार किसी के अच्छे कपड़े या रहन-सहन से वह कामयाब नहीं होता, बल्कि उसके विचारों के आधार पर वह आगे बढ़ता हैं और सफल होता हैं

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