एयरफोर्स की वॉर प्रैक्ट्रिस जारी चीन-पाक से निपटने को…. सुखोई-30 ने समुद्री तट पर बरसाए बम

Indian airforce ने हिंद महासागर और उससे काफी दूर तक हमले की capacity को जांचने के लिए war practice की।

एयरफोर्स के सुखोई-30 लड़ाकू विमान ने पूर्वी तट पर स्थित एयरबेस से उड़ान भरकर पश्चिमी समुद्री तटों पर कई टॉरगेट पर हमला किया। विमान ने 2,500 किलोमीटर की उड़ान भरी। इसके बाद सुखोई दक्षिणी एयरबेस पर उतरा। कुल मिलाकर सुखोई ने एक मिशन में 4,000 किमी की दूरी तय की।

 

एयरफोर्स के मुताबिक, ऐसा आईएल-78 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के चलते संभव हो सका, क्योंकि हवा में ही ईंधन भरने के बाद ही इतनी लंबी दूरी को कवर करना संभव है। बता दें कि ये 8 से 22 अप्रैल तक चलेगा। इस बार के गगनशक्ति युद्धाभ्यास को हाल के दशकों का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास माना जा रहा है। दरअसल, वायुसेना ने अपनी युद्ध की तैयारियों को परखने के लिए एक बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है। इसमें चीन और पाकिस्तान की ओर से होने वाले हरसंभव खतरे से निपटने पर विशेष ध्यान रखा गया है।

 

एयरफोर्स की ओर से जारी बयान के मुताबिक, गगनशक्ति के तहत पश्चिम में समुद्री सीमा पर हवाई क्षमता के संचालन को परखा गया। ये अभ्यास वायुसेना के प्रभाव का प्रदर्शित करने और भारतीय उपमहाद्वीप में अपने हितों के लिए काफी आगे तक जाकर हमला करने की क्षमता को परखने के लिए किया गया।

 

Indian airforce ने हिंद महासागर और उससे काफी दूर तक हमले की capacity को जांचने के लिए war practice की।

एयरफोर्स के सुखोई-30 लड़ाकू विमान ने पूर्वी तट पर स्थित एयरबेस से उड़ान भरकर पश्चिमी समुद्री तटों पर कई टॉरगेट पर हमला किया। विमान ने 2,500 किलोमीटर की उड़ान भरी। इसके बाद सुखोई दक्षिणी एयरबेस पर उतरा। कुल मिलाकर सुखोई ने एक मिशन में 4,000 किमी की दूरी तय की।

 

एयरफोर्स के मुताबिक, ऐसा आईएल-78 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के चलते संभव हो सका, क्योंकि हवा में ही ईंधन भरने के बाद ही इतनी लंबी दूरी को कवर करना संभव है। बता दें कि ये 8 से 22 अप्रैल तक चलेगा। इस बार के गगनशक्ति युद्धाभ्यास को हाल के दशकों का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास माना जा रहा है। दरअसल, वायुसेना ने अपनी युद्ध की तैयारियों को परखने के लिए एक बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है। इसमें चीन और पाकिस्तान की ओर से होने वाले हरसंभव खतरे से निपटने पर विशेष ध्यान रखा गया है।

 

एयरफोर्स की ओर से जारी बयान के मुताबिक, गगनशक्ति के तहत पश्चिम में समुद्री सीमा पर हवाई क्षमता के संचालन को परखा गया। ये अभ्यास वायुसेना के प्रभाव का प्रदर्शित करने और भारतीय उपमहाद्वीप में अपने हितों के लिए काफी आगे तक जाकर हमला करने की क्षमता को परखने के लिए किया गया।

 

 

इस दौरान रक्षा सचिव संजय मित्रा और वाइस चीफ ऑफ एयर स्टॉफ एयर मार्शल एसबी देव ने सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भी भरी। इस अभ्यास में नौसेना के निगरानी विमान पी-8आई और वायुसेना के टोही विमान अवॉक्स की मदद ली गई। अधिकारियों ने बताया कि दो सप्ताह के इस अभ्यास का मकसद वायुसेना की पूरी ताकत को परखना है। इसमें लड़ाकू विमानों के बेड़े शामिल हैं।

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