अपराधियों के आगे हाथ जोड़ रही सरकार, सुशासन पर बड़ा सवाल

हमेशा कानून अपना काम करेगा का दावा करने वाली नीतीश सरकार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी अब अपराधियों के आगे हाथ जोड़कर खड़े हो गए। अनुरोध कर दिया कि पितृपक्ष के दौरान अपराधी अपराध करना बंद कर दें। अन्य दिनों में तो अपराधी अपराध करते ही रहते हैं। नीतीश कुमार की सरकार हमेशा अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए प्रसिद्ध रही है। ऐसे में डिप्टी सीएम का बयान सरकार का अपराध से नियंत्रण के समाप्त होने की बात को साबित कर रहा है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पहले ही राज्य में अपराध के बढ़ते ग्राफ को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। अब तो उनका हमला कुछ अधिक ही बढ़ने वाला है।

लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासनकाल के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उनका मुख्य एजेंडा अपराध नियंत्रण व कानून का शासन रहा। लेकिन, 2013 में भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर अपनी अलग राह पकड़ने के बाद से ही नीतीश कुमार के नाम के आगे से अपराध नियंत्रण समाप्त होता गया। 2015 विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार खुलकर लालू प्रसाद यादव के साथ गए, महागठबंधन की सरकार बनी। इसके बाद तो अपराध काबू से बाहर हो गया। वह सारे गिरोह सक्रिय हो गए जो 2006 से पहले सक्रिय थे। नीतीश सरकार के आने के बाद जिनको मृतप्राय बनाया गया था।

सुशील मोदी ने कहा, अन्य दिनों में तो अपराधी अपराध करते ही हैं, इन दिनों में करें पितरों को याद. (फोटो : ट्विटर)

18 माह तक चले महागठबंधन में अपराध सिर चढ़कर बोल रहा था। नीतीश कुमार अपराध पर काबू पाने में तब भी नाकाम हो रहे थे। जब 2017 में महागठबंधन से अलग होकर एनडीए पार्ट टू की सरकार नीतीश कुमार ने बनाई तो स्थिति बदली नहीं। अपराधियों के मंसूबों को कामयाब होने से रोकने में पुलिस प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। पुलिसिंग को कसने की तमाम कोशिशें नाकामयाब साबित हो रही हैं। नीतीश कुमार कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समीक्षा बैठक कर रहे हैं। निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि थाना स्तर पर अपराधियों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई हो। देखा जाए कि किस स्थान पर अपराध हो रहा है। अपराध को लेकर माइक्रो इन्क्वायरी की तमाम बातें फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बिहार पुलिस के आलाधिकारियों की कमजोरी है।

वर्ष 2006 पर जब आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि नीतीश कुमार के पास एक डेडिकेटेड पुलिस अधिकारियों की टीम थी। अपराधियों पर लगाम के लिए लगातार अभियान चलाए गए। एनकाउंटर का जो दौर अभी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार में चल रहा है, उसका पहला सफल प्रयोग नीतीश कुमार कर चुके हैं। अपराधियों पर लगाम के लिए पुलिस की कमजोरी को दूर करने की जगह अब सरकार उनके सामने हाथ जोर रही है। उप मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी जब पितृपक्ष मेला का उद्घाटन करने गया पहुंचे तो उनके सामने कानून-व्यवस्था से संबंधित कई सवाल खड़े किए गए।

सुशील कुमार मोदी ने जवाब में मंच से अपराधियों के आगे हाथ जोड़कर दिया। अपराधियों से कहा, हम आपसे हाथ जोरकर अनुरोध करते हैं कि आप प्रदेश में पितृपक्ष के दौरान अपराध न करें। इस मौके पर अपने पितरों को याद करें। डिप्टी सीएम के इस अनुरोध पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा हो गया है कि सरकार अगर अपराध नियंत्रण में विफल साबित हो रही है तो उसके सत्ता में रहने का क्या मतलब है? ऐसी सरकार को तत्काल इस्तीफा दे दिया जाना चाहिए। लोकसभा चुनाव से पहले सुशील मोदी ने इस प्रकार की बात करके तेजस्वी यादव को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। वहीं इस बयान से न केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी व अमित शाह की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन नेताओं ने सत्ता में आने पर अपराध नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे 2015 में किए थे।

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