अगर ऐसा आपके साथ हो तो

जरा सोचिए जैसा व्यवहार आप जानवरो के साथ करते है अगर ऐसा व्यवहार आपके साथ हो तो क्या होगा? सोचा है कभी कैसे तड़पते होंगे वो जानवर जिनको आप मारकर अपनी प्लेट में रखकर खा जाते है ? नही सोचा न जरा सोच कर देखिए। आज हम आपको महसूस करवाना चाहते है की उन जानवरो का दर्द आखिर कैसा होता है। इंसानी सभ्यता में अक्सर मनावाधिकारों, इंसानियत और एक व्यक्ति की गरिमा की बात होती है. लेकिन क्या पशुओं के भी अधिकार होते हैं? या फिर वे सिर्फ मांस हैं?

अगर ऐसा आपके साथ हो तो

1. पुराने जमाने में शरीर को गर्म रखने के लिए इंसान पशुओं की खाल का प्रयोग करता था. लेकिन अब फैशन के नाम पर जानवरों को पाला और मारा जाता है ताकि उनके उनके फर को इस्तेमाल किया जा सके.

2. जर्मनी की राजधानी बर्लिन के ब्रांडेनबुर्ग गेट पर पशु अधिकार कार्यकर्ता. 6,20,000 लोगों को हस्ताक्षरों के जरिये उन्होंने जर्मन के पर्यावरण मंत्रालय से सर्कस में जंगली जानवरों के इस्तेमाल को रोकने की मांग की.

3. लिपिस्टिक, लिपबाम या क्रीम को टेस्ट करने के लिए चूहों का इस्तेमाल होता है. काजल की टेस्टिंग में खरगोशों को अंधा होना पड़ता है. जर्मन दर्शनशास्त्री और भौतिकविज्ञानी अल्बर्ट श्वाइत्जर के मुताबिक, “जब तक इंसान सभी जीवित प्राणियों के लिए स्नेह का घेरा नहीं बनाएगा, तब तक शांति हासिल नहीं होगी.”

4. स्पेन में होने वाली बुलफाइटिंग का विरोध करते कार्यकर्ता. 20वीं सदी की महान शख्सियतों में गिने जाने वाले भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था, “किसी राष्ट्र का नैतिक विकास इस बात से चेक किया जा सकता है कि वह पशुओं से कैसा बर्ताव करता है.”

5. चमड़े के लिए पशुओं को बड़े पैमाने पर कत्ल करने वाले उद्योगों के खिलाफ बार्सिलोना में इस अंदाज में प्रदर्शन हुआ.

6. 16वीं सदी में इटली में पैदा हुई महान शख्सियत लियोनार्दो दा विंची के मुताबिक, “एक दिन आएगा जब जानवर की हत्या को इंसान की हत्या की तरह देखा जाएगा.”

7. मीट उद्योग के लिए तैयार होने वाले जीवों को बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक खिलाये जाते हैं. शारीरिक विकास तेज करने के लिए उन्हें कई तरह के रसायन दिये जाते हैं. जरा सोचिये पशुओं पर क्या गुजरती होगी.

8. खुराक के अलावा इन जीवों को बेहद तंग माहौल में रखा और मारा जाता है.

9. फैशन उद्योग ने लोमड़ियों की बड़ी पैमाने पर बलि ली है. इसी का विरोध इस अंदाज में करते पशु अधिकार कार्यकर्ता.

10. बहुत सारे लोगों को अच्छे बैग, पर्स या बेल्ट बार बार खरीदने का शौक होता है, उनकी इस इच्छा की कीमत मगरमच्छों, सांपों, गायों या भैंसों को चुकानी पड़ती है.

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