वेटरन कादर खान के ये थे सबसे पसंदीदा डायलॉग, अमिताभ भी रह गए थे चुप!

बेहतरीन अदाकार और जबर्दस्त डायलॉग राइटर कादर खान 81 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए. कादर खान, दिमाग की एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनके मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया था. कादर, प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लियर पाल्सी डिसऑर्डर नाम की बीमारी से ग्रसित थे और आखिरी बार साल 2015 में फिल्म ‘दिमाग का दही’ में वो नज़र आए थे. एक इंटरव्यू में उनसे उनकी ज़िन्दगी से जुड़े कुछ सवाल हुए जिसमें उन्होंने अपने कई राज शेयर किए.

एक इंटरव्यू में जब उनसे उनकी सबसे पसंदीदा लाइंस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बिना किसी नोट के अपनी भारी आवाज़ में अपनी सबसे पसंदीदा लाइंस सुनाई.

फिल्म मुकद्दर का सिकंदर का एक सीन याद करते हुए कादर खान अपनी जादुई आवाज़ में कहते हैं कि फिल्म में मैं एक भिखारी के किरदार में था और मैं एक कब्रिस्तान में जाता हूं, जहां देखता हूं कि एक छोटा सा बच्चा (अमिताभ बच्चन) एक कब्र के पास बैठा रो रहा है. फिर….

किसकी कब्र पर बैठे हो बच्चों, हमारी मां मर गई है, उठो, आओ मेरे साथ चारों तरफ देखो. यहां भी कोई किसी की की बहन है, कोई किसी का भाई है, कोई किसी की मां है. इस शहर ए खामोशियों में, इस खामोश शहर में, इस मिटटी के ढेर के नीचे, सब दबे पड़े हैं. मौत से किसको रास्तागारी है? मौत से कौन बच सकता है? आज उनकी तो कल हमारी बारी है. पर मेरी एक बात याद रखना, इस फ़कीर की बात ध्यान रखना ये ज़िन्दगी में बहुत काम आएगी कि अगर सुख में मुस्कुराते हो तो दुःख में कहकहा लगाओ. क्योंकि जिन्दा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं, पर मुर्दों से बद्तर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं.

सुख तो बेवफा है चंद दिनों के लिए है, तवायफ की तरह आता है दुनिया को बहलाता है, दिल को बहलाता है और चला जाता है. मगर दुःख तो हमेशा साथी है. एक बार आता है तो कभी लौट कर नहीं जाता है. इसलिए सुख को ठोकर मार, दुःख को गले लगा, तकदीर तेरे क़दमों में होगी और तू मुकद्दर का बादशाह होगा.

फिल्म में भी ये लाइन दर्शकों के बीच सबसे ज्यादा पसंद की गईं वहीं इन्हीं से जुड़ा गाना ‘रोते हुए आते हैं सब, हंसता हुआ जो जाएगा, वो मुकद्दर का सिकंदर जानेमन कहलाएगा’ काफी ज्यादा फेमस हुआ और हमेशा के लिए हिट गानों के लिस्ट में भी शुमार हो गया.

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