इस गुफा का अंतिम छोर वैज्ञानिक भी नहीं तलाश पाए, भगवान महादेव का दिन-रात बजता है डमरू

कई दर्शनीय स्थल गुफा में अंदर लंबी दूरी तक प्रवेश करने वाले लोग बताते हैं कि इसमें कई दर्शनीय स्थल हैं। हनुमान जी, भोलेनाथ की प्रतिमाएं हैं, नागफनी शिला, गउनंन्दनी, नर्मदा जल की धार, गुप्त गंगा जैसे स्थान बताए जाते हैं।
रायसेन जिले के कस्बा बाड़ी से लगभग पांच किमी दूर ग्राम कासिया पाटनी से लगी विंध्यांचल पर्वत श्रंखला नारद जी की
तपोस्थली रही है। किवदंतियों के अनुसार इस पहाड़ी के नीचे लंबी गुफा कई रहस्यों को अपने में समेटे है।
मृगन्नाथ की गुफा के नाम से प्रसिद्ध इस गुफा का आज तक कोई छोर नहीं मिल सका है।हजारों मीटर अंदर जाकर लोग वापस लौट आए लेकिन गुफा का अंतिम छोर नजर नहीं आया।
 बाड़ी से दक्षिण दिशा मे स्थित है ये स्थान निममार्क आश्रम काषिया पाटनी मृगन्नाथ धाम गुफा मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस गुफा का प्रवेश द्वार इतना छोट है कि अंदर जाने के लिए लेटकर प्रवेश करना पड़ता है। लेकिन अंदर जाने के बाद जो रास्ते दिखाई देते हैं, वे किसी नगर की सड़कों की तरह हैं।
चौराहे, तिराहे और ऋषि मुनियों की यज्ञ स्थली इस गुफा में मिलती हैं। जो इस बात का प्रमाण हैं कि यह गुफा पुरातन काल में योगियों, ऋषि-मुनियों की तप स्थली रही है। ऐसे में यह कहना कि नारद मुनि ने इस पहाड़ी पर तपस्या की थी, अतिश्योक्ति नहीं होगा।
कई दर्शनीय स्थल गुफा में अंदर लंबी दूरी तक प्रवेश करने वाले लोग बताते हैं कि इसमें कई दर्शनीय स्थल हैं। हनुमान जी, भोलेनाथ की प्रतिमाएं हैं, नागफनी शिला, गउनंन्दनी, नर्मदा जल की धार, गुप्त गंगा जैसे स्थान बताए जाते हैं।
रोशनी लेकर जाएं गुफा में प्रवेश करते ही कुछ मीटर बाद धुप अंधेरा हो जाता है। संकरे प्रवेश द्वार से लगभग 25-30 मीटर भीतर तक ही उजाला पहुंच पाता है। इसके बाद टॉचज़् या केरोसिन लेंप लेकर जाना पड़ता है। वापस लौटते समय रास्ता न भूलें इसके लिए लोग रास्ते पर चिन्ह छोड़ते जाते हैं। या फिर धागे की गिट्टी का एक सिरा प्रवेश द्वार पर बांधकर आगे बढ़ते हैं।
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