आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर विचार कर रही है मोदी सरकार

केंद्र सरकार आर्थिक आधार पर 15-18 फीसदी आरक्षण देने पर विचार कर रही है. इसको लेकर अब कांग्रेस का रुख सामने आया है. कांग्रेस ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की सरकार की पहल पर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है.

आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर सरकार के भीतर जो विचार चल रहा है इसके तहत सरकार सभी जातियों में आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों को आरक्षण देना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक विचार अभी प्रारम्भिक स्तर पर है, लेकिन बातचीत में प्रमुख मुद्दा ये है कि कैसे वर्तमान आरक्षित जातियों को बिना छुए आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए. इसका मतलब है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के अलावा पिछड़े तबके को संविधान में मिले आरक्षण को बिना छेड़े आर्थिक आधार पर सभी जातियों के लिए आरक्षण देने पर केंद्र सरकार विचार कर रही है.

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि 15% से 18% आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है ऐसा करने से बार-बार नई- नई जातियों से उठने वाली आरक्षण की मांग का निदान हो सकेगा. हालांकि केंद्र सरकार किसी नतीजे पर नही पहूँची है. सूत्रों के मुताबिक आर्थिक आधार पर आरक्षण पर प्रधानमंत्री मोदी आखिरी फैसला लेंगे.

सूत्रों के मुताबिक संविधान में संशोधन कर आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी से बढ़ायी जा सकती है. संसद के शीतकालीन सत्र में बिल आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए बिल लाया जा सकता है. सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि 15 फीसदी से 18 फीसदी आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है.

आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए के लिए केंद्र सरकार संविधान संशोधन करना चाहती है इसके लिए संसद में संविधान संशोधन बिल लाया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि आर्थिक आधार पर आरक्षण तभी लागू हो सकता है, जब संविधान में संशोधन कर आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% के कैप को बढ़ाया जा. सूत्रों के मुताबिक संसद में शीतकालीन सत्र में बिल लाया जा सकता है, तब तक सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण से जुड़ी तमाम कवायद भी पूरी कर लेगी.

शीत कालीन सत्र इस लोकसभा का आखिरी सत्र होगा ऐसे में सरकार शीतकालीन सत्र में 15% से 18% तक आर्थिक आधार पर आरक्षण का बिल ला सकती है. हाल ही में महाराष्ट्र और गुजरात के पाटीदार सहित जाटों की ओर से आरक्षण देने की मांग उठती रही है. ये जातीय सामाजिक रूप से और आर्थिक रूप से मज़बूत हैं, साथ ही साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद ताकतवर हैं. इस सब के वाबजूद इन जातियों सहित ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया सहित बाकी जातियों में ऐसा तबका भी है जो आर्थिक रूप से बेहद पिछड़ा है. ऐसे में अगर इस तबके को आरक्षण से जोड़ा जाए तो इस आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को भी आगे आने का मौका मिला सकता है.

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