जानिये एक ऐसी सब्जी के बारे जो असल में फल है

टमाटर सब्जी नहीं है , लेकिन गिना सब्ज़ियों में जाता है। वह फल है , लेकिन उसका कुनबा अजब-ग़ज़ब साथियों की बेढब जमात है। उसके कुनबे में बैंगन है , तम्बाकू भी। उसकी छत के नीचे मटमैला आलू है , काली मिर्च है और ख़ूबसूरत पेट्यूनिया भी।

जानिये एक ऐसी सब्जी के बारे जो असल में फल है

टमाटर दक्षिण अमेरिका से आया। सोलानेसी-सदस्य । सूर्य से विपरीत वृद्धि करने वाला। नाइटशेड नामधारी। जिसे रात्रि भाती है। जिस कुनबे के फूल रात में फूलते हैं। सूर्य से जिसका विपरीत सम्बन्ध है। स्पेन ने दक्षिण अमेरिका पर हमला किया , उन्हें बहुत कुछ मिला। उसी सम्पदा में टमाटर भी। उसे वे यूरोप लाये और वह हर जगह फैल गया। फ़्रांस पहुँचा तो उसे उन्होंने प्रेम का फल कह दिया। ऐसे अटपटे नामकरण फ़्राँसीसियों की आदत में फ़ितरतन शुमार हैं। लाल हो , रात को खिलते हो , खाये जा सकते हो — बस , फिर तो मुहब्बत से जोड़े जा सकते हो। मुहब्बत भी अफ़लातूनी नहीं , विशुद्ध दैहिक। सो चटख फल से उन्होंने कामवृद्धि को जोड़कर देखा और नाम गढ़ लिया।

लेकिन टमाटर का परिवार विज्ञान के लिए अनूठा है। इस परिवार पर न जाने कितने ही कोशिकीय , आनुवंशिक और वैषाण्विक शोध हुए हैं। न जाने कितनी ही बातें पादप-विज्ञानियों को टमाटरी खानदान से जानने को मिली हैं।

वैज्ञानिकों ने टमाटर के जीनोम का पूरा-का-पूरा क्रम जान लिया है ; उसे सीक्वेंस कर लिया है। बारह गुणसूत्र हैं इस पौधे में। सभी गुणसूत्र पढ़ लिये गये हैं। और सबसे विलक्षण बात यह जानने को मिली है कि इस पौधे ने दो मौक़ों का इस्तेमाल करके अपना पूरा जीनोम तिगुना कर लिया है ! एक सौ तीस मिलियन साल पहले अपनी आनुवंशिक सामग्री दुगुनी की और फिर साठ मिलियन साल पहले तिगुनी। यानी आपके पास जितनी जेनेटिक सामग्री एक-एक कोशिका में थी , वह सब दो मौक़ों में पहले डबल हुई और फिर ट्रिपल। इस तरह से हमारा टमाटर आज-सा टमाटर हो सका।

क्या हो अगर हम मनुष्य अपनी जेनेटिक सामग्री दुगुनी-तिगुनी-चार गुनी कर पाएँ ? जीन अधिक होंगे , तो क्या हम बेहतर होंगे ? यक़ीनन कई मायनों में होंगे। लेकिन फिर अधिक जीन यानी अधिक म्यूटेशन अर्थात् जेनेटिक त्रुटियाँ। त्रुटियाँ जो कैंसर की जन्मदात्री हैं।

फिर दुगुने-तिगुने होते जीनोम के साथ वाला जीव वही मूल जीव कहलाएगा अथवा कुछ और ही हो जाएगा ? टमाटर अपने मूल पुरखे से कितना अलग हुआ है ? पहले क्या वह इतना रसीला और आधुनिक रहा होगा ? और इस तरह से मनुष्य स्वयं के डीएनए को बढ़ाता चला जाए , तो क्या वह मनुष्य ही रहेगा या कुछ और ?

सवाल ज़रूरी हैं। जवाब भी आएँगे।

फिलहाल आप टमाटर की सब्जी का आनंद लें |

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