अटल जी का वो फैसला, जिसने बदल दी मोदी की किस्मत

आपको बता दें कि व्यक्तित्व के धनी वाजपेयी उन नेताओं में से हैं जिनकी प्रशंसा विरोधी दलों के नेता भी करते हैं। जबकि मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी भी अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे बड़े प्रशंसकों में से एक हैं। वाजपेयी और मोदी के बीच बेहतर संबंधों को लेकर मीडिया में कई तरह की जानकारियां पहले से मौजूद है।

ऐसे में आज आपको पीएम मोदी और पूर्व पीएम जुड़ी एक रोचक और महत्वपूर्ण बात बता रहे हैं। दरअसल ये बात तो सभी लोग जानते हैं कि पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, लेकिन आप शायद ही ये बात जानते होंगे कि मोदी को मुखंयमंत्री बनाने का फैसला भी अटल बिहारी वाजपेयी का ही था।

दरअसल इस दौरान साल 1998 में गुजरात में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और केशुभाई पटेल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया। इस बीच साल 2001 में गुजरात में भयंक भूकंप आया और राज्य की हालत बेहद ही खराब हो गई, जिसे संभालने में मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की सरकार नाकाम साबित हो रही थी।

अटल जी का वो फैसला जिसने भारत की तकदीर बद दी!

बताया जाता है कि भूंकप के बाद राज्य की स्थित से निपटने में नाकाम होने के काराण राज्य की जनता में काफी आक्रोश दिख रहा था। जिसके बाद सीएम केशुभाई पटेल ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया और तेजी से बदलते हालातों के बीच इसी दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने।

ऐसा कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी साल 2001 के अक्टूबर महीने में दिल्ली गए, जहां अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया और वाजपेयी से मुलाकात के बाद मोदी तुरंत गुजरात के लिए रवाना हुए और राज्य के मुख्यमंत्री का भार संभाला। इसके बाद नरेंद्र मोदी लगतारा गुजरात के सीएम बने रहे हैं।

साल 2002, 2007 और 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया और देखते ही देखते देश भर में मोदी की लोकप्रियता इतनी बढ़ी की देश में ‘मोदी लहर’ चल पड़ी और बीजेपी ने ऐतिहासिक बहुमत के साथ जीत दर्ज किया।

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