जानिए क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव, क्या हैं इसके नियम

मानसून सेशन के पहले ही दिन मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की तरफ से मॉब लिंचिंग समेत कई मुद्दों पर अविश्वास प्रस्ताव (नो कॉन्फिडेंस मोशन) लाया गया है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इसे मंजूर भी कर लिया और अब शुक्रवार को इस पर बहस होगी। हालांकि, सरकार के पास संख्याबल को देखते हुए ऐसा माना जा रहा है कि मोदी सरकार आसानी से अपना बहुमत साबित कर लेगी।  लेकिन, अब ये सवाल उठता है कि क्या है अविश्वास प्रस्ताव और कब, किसके खिलाफ इसे लाया जाता है? आइये इस पूरी प्रक्रिया को विस्तार से जानते हैं-
क्या है नियम
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संविधान में कोई जिक्र नहीं किया गया है। लेकिन, अनुच्छेद एक सौ अठारह के अंतगर्त हर सदन अपनी प्रक्रिया बना सकता है। जबकि, नियम 198 के तहत ऐसी व्यवस्था है कि कोई भी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है। ठीक ऐसे ही मंगलवार यानि 18 जुलाई को तेलुगू देशम पार्टी और कांग्रेस सदस्य की तरफ से नोटिस दिया। जिस पर अब शुक्रवार को बहस होगी।
कैसे प्रस्ताव होता है पारित
दरअसल, प्रस्ताव पारित कराने के लिए सबसे पहले विपक्षी दल को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी लिखित सूचना देनी होती है। इसके बाद स्पीकर उस दल के किसी सांसद से इसे पेश करने के लिए कहता/कहती हैं। यह बात सदन में तब उठती है जब किसी दल को लगता है कि सरकार सदन का विश्वास या बहुमत खो चुकी है।

कब मंजूर होता है अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन हासिल होना चाहिए तभी उसे स्वीकार किया जा सकता है। लोकसभा अध्यक्ष या स्पीकर की मंजूरी मिलने के बाद 10 दिनों के अदंर इस पर चर्चा कराई जाती है। चर्चा के बाद स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग कराता है या फिर कोई फैसला ले सकता है।

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