इस बाहुबली नेता का चलता था सिक्का, 4 बार विधायक और एक बार रहा सांसद, अब नहीं मिल रहा टिकेट

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब सपा और सपा की चलती थी तब एक नेता ऐसा था जिसका सिक्का चलता था. बिना उसके चुनाव की बात इस जीले में नहीं हो पाती थी. कई बार विधायक और एक बार सांसद का चुनाव जीत चुका है. उसे मायावती ने सांसद रहते गिरफ्तार करवाया था. अब उसी को कोई पार्टी टिकेट तक नहीं दे रही है. उसका नाम है उमाकांत यादव.

ऐसे आये थे राजनीती में

उमाकांत यादव 1991 में पहली बार बीएसपी के सहारे अपराधी चोला उतारकर हाथी पर सवार होकर राजनीति में अपना कदम रखा. इस विधान सभा चुनाव में वे खुटहन से विधायक चुने गए.उसके बाद 1993 में वे सपा बसपा गठबंधन से दूसरी बार इसी सीट से विधायक चुने गए. 1996 के चुनाव में सपा बसपा गठबंधन टूटने के बाद उमाकांत यादव हाथी की सवारी छोड़कर साईकिल पर सवार हो गए. इस चुनाव एक बार फिर विधायक चुने गए. 2002 विधान सभा चुनाव में उमाकांत बीजेपी जदयू गठबंधन से खुटहन से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उन्हें जनता ने बुरी तरह नकारते हुए बसपा प्रत्यासी शैलेन्द्र यादव ललई को अपना विधायक चुना.

२००४ में थे सांसद

वर्ष 2004 में उमाकांत यादव ने लोकसभा का चुनाव जीता था. बसपा ज्वाइन किये थे. इन्होने भाजपा के दिग्गज नेता केशरी नाथ त्रिपाठी जो पश्चिम बंगाल के राज्यपाल है उन्हें हराया था. लेकिन मायावती ने उन्हें किसी मामले में गिरफ्तार करवा लिया था. उसके बाद से इनकी राजनीती ही ख़त्म हो गई.

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