ये बंधन दिलों के बंधन ये नाते दिलों के नाते, रक्षाबंधन शायरी

चंदन की लकड़ी फूलों का हार अगस्त का महीना सावन की फुहार भाई की कलाई पर बहन का प्यार मुबारक हो आपको राखी का त्यौहार हैपी रक्षा बंधन।

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हर गली फूलों से सजा रखी है हर चौक पर लड़कियां बिठा रखी है जाने किस गली से गुजरेंगे आप हर लड़की के हाथ में राखी थमा रखी है।

ना तोप से ना तलवार से बंदा डरता है तो सिर्फ राखी के त्योहार से।

चंदन का टीका रेशम का धागा सावन की सौगंध बारिश की फुहार भाई कि उम्मीद बहना का प्यार मुबारक हो आपको रक्षाबंधन का त्यौहार।

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भाई का प्यार किसी दुआ से कम नहीं होता चाहे दूर भी हो कोई गम नहीं होता अक्सर रिश्ते दूरियों से फीके पड़ जाते हैं फिर भी बहन का प्यार कभी कम नहीं होता।

हनीप्रीत के धागों के बंधन में इसने कर रहा संसार सारे जग में सबसे सच्चा होता है भाई बहन का प्यार इस सच्चे प्यार को दर्शाता है या राखी का पावन त्यौहार।

बहन चाहे कितनी भी दुबली-पतली क्यों ना हो भाई हमेशा कहता है कम खा मोटी हो जाएगी।

बहन मांगे भाई का प्यार नहीं चाहिए महंगे उपहार रिश्ता अटूट रहे सदियों तक मिले मेरे भाई को खुशियां अपार।

बहन का प्यार एक सफेद रोशनी है जिसमें हमारे बचपन की किलकारियां एक संगीत बनकर गूंजती है।

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