UP.बैंक सखी बन समूह की महिलाएं बदल रहीं अपनी तकदीर

एक योजना ने गांव की महिलाओं में स्वावलंबन का मंत्र फूंक दिया है।  कम-पढ़ी लिखी और घूंघट में घिरी महिलाओं ने समूह में छोटी बचत का गुर क्या सीखा कि उनमें आत्मनिर्भर बनने की ललक जग गई। बैंक सखी बन महिलाओं को आर्थिक आजादी का पाठ पढ़ाने लगीं। समूह की महिलाएं स्कूलों को ड्रेस सप्लाई करने लगी। यही नहीं चीन की महिलाओं की तरह अब अपने घरों से इलेक्ट्रानिक उपकरण बनाने की दिशा में निकल पड़ी हैं।
समूह बनाए और बचत की आदत डाली
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं के लिए बनाए गए स्वयं सहायता समूह आधी आबादी को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। गत दो वर्षा से एनआरएलएम महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी सकारात्मक कार्य कर रहा है। इसका परिणाम है कि समूहों ने बड़ी कामयाबी हासिल की। वह बचत से आगे बढ़कर अपना खुद  का काम शुरू कर रही हैं। अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। ऐसे कामों को आगे बढ़ा रहीं हैं जो अभी तक पुरुष प्रधान माने जाते थे। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, हौसला बढ़ाने और मदद प्रदान करने में पूर्व सीडीओ प्रशांत शर्मा (आईएएस) व वर्तमान सीडीओ मनीष बंसल (आईएएस) का बहुत बड़ा योगदान है।

समूह कर रहे ड्रेस का कारोबार
समूह की महिलाएं अब ड्रेस के कारोबार में उतर गई हैं। जिले के आठों ब्लॉक के 30 हजार बच्चों को महिला समूह ड्रेस आपूर्ति कर रहे हैं। सीडीओ मनीष बंसल ने स्कूलों को समूह से ड्रेस लेने के निर्देश भी दिए हैं। सरोजनीनगर में छह हजार, मोहनलालगंज में चार हजार, माल व गोसाईंगंज में पांच-पांच हजार व बीकेटी में सात हजार,जबकि काकोरी, चिनहट और मलिहाबाद में एक-एक हजार ड्रेस समूह के जरिए खरीदे जा रहे हैं।  सोलर मिलियन कार्यक्रम के तहत जल्द ही कक्षा एक से 12 वीं तक के स्कूल के बच्चों को सोलर स्टडी लैंप दिए जाएंगे। इन सोलर लैंपों को जोड़ने (एसेंबल) का काम समूह की महिलाएं करेंगी।
बैंक सखी बन कर रही महिलाओं की मदद
बैंक में सखी बनकर समूह की महिलाएं अपनी अन्य बहनों को बैंकिंग सिखा रही हैं।  सखी बनकर यह महिलाएं समूह की वित्तीय समस्याओं का हल भी करेंगी। ऐसी बैंक शाखाएं जहां कम से कम 30 समूहों के खाते खुले हैं, उन बैंक शाखाओं में एक सखी रखी गई हैं। सरोजनीनगर ब्लॉक की छह बैंक के लिए सखियों का चयन हो गया है।
राजमिस्त्री और मशरूम की खेती कर रही महिलाएं : स्वयं सहायता समूह की महिलाएं राजमिस्त्री 35 का काम सीखकर कई गांवों में शौचालय भी बनाए हैं। वहीं समूह में अपने घरों पर मशरूम की खेती करके पैसा कमा रही हैं।

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