जब भगत सिंह को फांसी से बचाने के लिये आज़ाद ने की थी नेहरू से बात, जानिए फिर क्या हुआ

मिशन-2019 में आपका स्वागत है। दोस्तों क्या आपको पता है भारत के वीर सपूत चंद्रशेखर आज़ाद की मौत कैसे हुई थी? अगर नहीं तो ये आर्टिकल पूरा पढें। असल में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सज़ा मिली थी। उनका जुर्म था कि उन्होंने अंग्रेज अफसर सांडर्स की हत्या कर दी थी और दिल्ली असेम्बली में बम विस्फोट किया था।

जब भगत सिंह को फांसी से बचाने के लिये आज़ाद ने की थी नेहरू से बात, जानिए फिर क्या हुआ

लेकिन अब हुआ यूं कि चंद्रशेखर आजाद उन तीनों देशभक्तों की सज़ा माफ कराना चाहते थे। वो चाहते थे कि उन तीनों की सज़ा फांसी से उम्रकैद में बदल दिया जाए। इसलिए पहले वह गणेश शंकर विद्यार्थी से मुलाकात किये। जिन्होंने उनको जवाहरलाल नेहरू से बात करने की सलाह दी। और फिर 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद में आकर उन्होंने तीनों की सज़ा माफ कराने का आग्रह किया। लेकिन नेहरू ने उन्हें गुस्से में आकर घर से बाहर निकाल दिया।

इसके बाद आज़ाद अपनी साइकिल लेकर अल्फ्रेड पार्क चले गये। और अल्फ्रेड पार्क में एक पुराने मित्र से कुछ चर्चा करने लगे। उसी दौरान अचानक अंग्रेज अफसर भारी संख्या में पुलिस लेकर पहुंच गया और उन्हें घेर लिया गया। लेकिन लड़ते लड़ते जब अंत में सिर्फ एक गोली बची तो गिरफ्तारी के बजाय उन्होंने खुद को शहीद करना बेहतर समझा। इसके बाद अंग्रेजों ने किसी को बताए बगैर उनका अंतिम संस्कार कर दिया।

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