अमेरीका की बड़ी धमकी, भारी संकट में भारत

टैरिफ के मसले पर अमरीका और चीन के बीच तनाव जारी है जिसके चलते उन्हें तो नुक्सान उठाना पड़ रहा है वहीं शुक्रवार को एशियाई मुद्राओं में काफी कमजोरी देखी गई। गौरतलब है कि चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
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अमरीका द्वारा 23 अगस्त से 16 अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर 25 फीसद टैरिफ लगा दिया गया है। अमरीका के इस कदम के खिलाफ चीन ने जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है और कहा है कि वह भी 200 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर 25 फीसद टैरिफ लगा सकता है। इस ट्रेड वॉर से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा ही पर साथ ही भारत को भी इसका नुक्सान उठाना होगा।
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गुरुवार को अर्जेंटीना पेसो(करंसी) 13.12 प्रतिशत गिर गई। संदेह जताया जा रहा है  पेसो के गिरने से आर्थिक संकंट उभर सकता है वहीं शुक्रवार को भारतीय रुपए में 71 रुपए प्रति डॉलर की गिरावट आई, जबकि इंडोनेशियाई रुपिया 20 साल के निचले स्तर पर चला गयाा। विश्लेषकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सितंबर में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद और अर्जेंटीना और तुर्की में आर्थिक संकट के चलते क्षेत्रीय मुद्राओं में अधिक दबाव महसूस होगा। चीन के युआन(करंसी) को लगातार पांचवें मासिक गिरावट के लिए सेट किया गया था, हालांकि जून और जुलाई दोनों में 3 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले अगस्त में घाटा मामूली था।”
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अमरीकी डॉलर के आगे बाकी करंसी हो रही कमजोर
इसके पहले तुर्की में आर्थ‍िक संकट ने रुपए के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। तुर्की करंसी लिरा के कमजोर होने का असर रुपए पर दिखा था। ग्लोबल मार्केट में लगातार बन रहे जटिल हालातों की वजह से फिलहाल रुपए का मजबूत होना आने वाले कुछ समय में मुश्किल दिख रहा है।
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इन कारणों से लुढ़का रूपया

  • रुपए में गिरावट के पीछे ऑयल इम्पोर्टर्स को भी एक कारण माना जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दामों में तेजी भी इसके पीछे वजह मानी जा रही है।
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका तथा तेल आयातकों की मजबूत डॉलर मांग को इसके पीछे वजह माना जा रहा है। फिलहाल रुपया लगभग रोज ही डॉलर के मुकाबले टूट रहा है।
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