भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार किया दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन का सबसे अहम हिस्सा

नैशनल सेंटर फॉर रेडियो ऐस्ट्रोफिजिक्स (एनसीआरए) के नेतृत्व में भारतीय वैज्ञानिकों ने स्क्वेयर किलोमीटर ऐरे (एसकेए) टेलिस्कोप प्रॉजेक्ट (दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन) के टेलिस्कोप मैनेजर को डिजाइन करने का अपना काम पूरा कर लिया है। एसकेए के लिए काम कर रही कुल 12 अंतरराष्ट्रीय इंजिनियरिंग टीमों में से यह पहली टीम है, जिसने अपने हिस्से का काम पूरा किया है।
जानकारी के मुताबिक, यह टेलिस्कोप मैनेजर नर्वस सिस्टम की तरह काम करते हुए टेलिस्कोप की कंट्रोलिंग, मॉनिटरिंग और संचालन का काम करेगा। बता दें कि एसकेए अंतरराष्ट्रीय सामूहिक प्रॉजेक्ट है, जिसके तहत विश्व के सबसे बड़े रेडियो टेलिस्कोप को बनाने पर काम चल रहा है।

भारत की जीएमआरटी दूरबीन से 50 गुना बड़ी होगी यह
एसकेए की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, एसकेए एक दिन में इतना डेटा कलेक्ट कर सकता है, जिसे आईपॉड पर देखने में 20 लाख साल लग जाएंगे। यह आसमान का व्यापक पैमाने पर अध्ययन करेगा। इसका आकार भारत के जायंट मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप (जीएमआरटी) से लगभग 50 गुना ज्यादा होगा।

भारत की जीएमआरटी ऑब्जर्वेटरी के डीन और सीनियर प्रफेसर यशवंत गुप्ता ने कहा, ‘इसपर 2013 में ही काम शुरू हो गया था, इसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ऐंड परसिस्सटेंट सिस्टम के रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट टीम ने हमारी मदद की। कई टीमें इसपर अलग-अलग जगहों से काम कर रही हैं इसलिए इसमें समय भी ज्यादा लग जाए।’ उन्होंने आगे बताया, ‘दो महीने पहले मैनचेस्टर में क्रिटिकल डिजाइन रीव्यू तैयार किया गया। दो दिन पहले ही हमने पहले फेज का काम सफलतापूर्वक समाप्त करने का सर्टिफिकेट प्राप्त किया।’

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