बुराड़ी केस : अपनी मौत से 22 लोगों की जिंदगी में रौशनी भर गया भाटिया परिवार

मां ने कहा था कि मरने के बाद मेरी आंखें दान कर देना। उनकी इसी बात को अंतिम इच्छा समझ कर उनके साथ परिवार के अन्य 10 सभी सदस्यों की आंखें भी दान कर दीं। ये बातें कहते-कहते बुराड़ी हत्याकांड में नारायणी देवी के जीवित बचे बेटे दिनेश रोने लगे।

रूंधे गले से उन्होंने बताया कि परिवार के बाकी सदस्य भी धार्मिक विचारों वाले थे। मौत के बाद भी उनकी आंखों लोगों के काम आ सकेंगी। यही वजह है कि मां के साथ परिवार के बाकी सदस्यों की आंखें दान करने का फैसला लिया गया। डॉक्टरों ने सभी मृतकों की आंखें सुरक्षित रखवा दी हैं। गुरु नानक आई सेंटर के डॉक्टरों ने परिवार की सहमति मिलने के बाद मृतकों की आंखें सुरक्षित रखवा दी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन आंखों से करीब 22 लोग देख सकेंगे।

एक साथ हुआ 11 लोगों का अंतिम संस्कार

बुराड़ी में हुए हत्याकांड में सोमवार को दोपहर बाद मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद सीधे निगम बोध घाट भेजा गया। बड़ी संख्या में मौजूद पुलिसकर्मियों के पहरे के बीच एक साथ 11 सदस्यों का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के लिए निगम बोध घाट पर मौजूद पुलिस अधिकारियों की देखरेख में सभी तैयारियों को शवों के आने से पहले ही पूरा कर लिया गया था। परिवार में रिश्तेदारों और पहचान वालों को पहले ही अंदर कर दिया गया था। शवों के घाट पर पहुंचने के बाद पुलिस ने बेरिकेड लगाकर अंदर जाने का प्रवेश द्वार मीडिया और बाकि के लोगों के लिए बंद कर दिया और पुलिस के आलाअधिकारियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

करणी सेना ने सीबीआई जांच की मांग की : बुराड़ी में भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौत मामले में करणी सेना के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष प्रशांत सिंह ने सेना ने सीबीआई जांच की मांग की है। कार्यकर्ताओं ने शवों को ले जाने का विरोध भी जताया।

Facebook Comments