कैंसर जैसी बीमारियां….पॉलिपैक गर्म चाय पिने से हो सकती है …….

अक्सर हम ऑफिस में, कॉलेज कैंटीन में पॉलिपैक में गर्म चाय मंगवा लेते हैं। कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर पी.के. जुल्का ने कहा कि यह नुकसानदायक है। लंबे समय तक पॉलिपैक की चाय पीना कैंसर का कारण बन सकता है।

 

दरअसल, बेहद गर्म चीजों के साथ प्लास्टिक का रिऐक्शन होता है तो कैंसर कारक तत्व पैदा होते हैं। इसी तरह खाने की दूसरी चीजों को भी गर्म प्लास्टिक कंटेनर में न रखें। प्लास्टिक शीशी में दवाएं भी सेफ नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार पानी में न घुल पाने और बायोकेमिकली ऐक्टिव न होने की वजह से प्योर प्लास्टिक बेहद कम जहरीला होता है। लेकिन जब इसमें दूसरी तरह के प्लास्टिक और कलर आदि मिला दिए जाते हैं तो यह नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

अमेरिका के फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस बात को माना है कि प्लास्टिक एक समय के बाद केमिकल छोड़ने लगती हैं, डॉक्टर पी.के. जुल्का ने कहा कि गर्म करने से इन कंटेनर्स के प्लास्टिक के केमिकल्स टूटने शुरू हो जाते हैं और फिर ये खाने-पीने की चीजों में मिक्स हो जाते हैं।

 

पानी की बोतल गर्म न होने दें

प्लास्टिक से बनीं पानी की बोतलों और कप-ग्लास को एक बार इस्तेमाल करके तोड़ देना चाहिए। प्लास्टिक बोतल को तेज धूप में न रखें। क्योंकि गर्म होकर इन प्लास्टिक बोतलों से केमिकल निकलकर पानी से रिऐक्ट कर सकता है। ऐसे पानी या सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि को न पिएं।

बच्चों को बचाएं

बच्चे को फीड करने के लिए प्लास्टिक बॉटल का इस्तेमाल न करें। इसकी जगह स्टील या कांच की बॉटल यूज करें।

अगर प्लास्टिक की बॉटल यूज करना ही है तो अच्छी क्वॉलिटी की लें। बॉटल के ऊपर BFA फ्री या BFR फ्री या लेड फ्री आदि लिखा हो तो बेहतर है।

प्लास्टिक बॉटल को माइक्रोवेव या गैस पर पानी में बिल्कुल न उबालें।

बॉटल को गर्म पानी से साफ करना काफी है। इसके अलावा क्लोरीन सलूशन से साफ कर सकते हैं। इससे सारे कीटाणु निकल जाते हैं।

बॉटल, लंच बॉक्स या फिर स्टोरेज कंटेनर के तौर पर प्लास्टिक का इस्तेमाल कम-से-कम करें।

दो-तीन साल में प्लास्टिक कंटेनर और बॉटल आदि बदल दें।

सिल्वर फॉइल में बहुत गर्म खाना न रखें, न ही उसमें रखकर खाना माइक्रोवेव में गर्म करें।

यूज करने के बाद प्लास्टिक प्रॉडक्ट को जलाएं नहीं, रिसाइकल के लिए दें।

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