करुणानिधि, दक्षिण की राजनीति का वो शख्स जो नेहरू से लेकर मोदी तक के लिए बना रहा चुनौती

एम करुणानिधि, फिल्मों की पटकथा लिखते-लिखते बन गए दक्षिण के हीरो। नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक यह शख्स दक्षिण की राजनीति में चुनौती बना रहा। जी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के प्रमुख एम करुणानिधि अस्पताल में आखिरी सांसे गिन रहे हैं। अस्पताल के बाहर उनके समर्थकों का हुजूम लगा हुआ है, और यह ऐसे ही नहीं है।

करुणानिधि, दक्षिण की राजनीति का वो शख्स जो नेहरू से लेकर मोदी तक के लिए बना रहा चुनौती

एम करुणानिधि.(फोटो:गूगल)

भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु से आनेवाले इस शख्स की शख्सियत ऐसी है कि दिल्ली तक राजनीति में धमक देखने को मिलती है। यही कारण है कि जब वे बीमार हुए तो राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर देश के तमाम बड़े नेता उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे। 5 बार तक तमिलनाडु में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहनेवाले करुणिनिधि के बारे में आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वे पिछले 60 सालों में कभी चुनाव नहीं हारे।

अस्पताल में भर्ती करुणानिधि.(फोटो:गूगल)

राजनीति से पहले करुणानिधि तमिल फिल्मों के लिए पटकथा लिखते थे। नाटक, कहानी और उपन्यास लिखते-लिखते वे युवा राजनेता से प्रभावित हो गए और उसके प्रदेशव्यापी आंदोलन में बढ़-चढ़कर शरीक हो गए। पटकथा लिखते लिखते करुणानिधि कब दक्षिण की राजनीति के हीरो बन गए यह पता ही नहीं चला।

अस्पताल में मिलने पहुंचे राहुल गांधी.(फोटो:गूगल)

करणानिधि की राजनीति ऐसी है कि भारत जैसे हिंदी बाहुल्य देश में हिंदी के ही खिलाफ वे मोर्चे में शामिल हुए। जिस देश की पूरी राजनीति राम के नाम पर घूमती है, उसी राम की मौजूदगी पर सवाल करुणानिधि ने सवाल उठाए। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत दो शादी कानूनी रूप से अपराध है, वहीं करुणानिधि सार्वजनिक रूप से दो महिलाओं के साथ रहे। 14 साल की उम्र से राजनीति में आनेवाले करुणानिधि अपने 80 साल के राजनैतिक करियर में दक्षिण भारत में जवाहर लाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के लिए चुनौती बने रहे। यही शख्स आज जब अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच खड़ा है तो लोग उनके स्वस्थ होने की दुआएं कर रहे हैं। हाल के दिनों में ऐसे जननेता की झलक किसी में नहीं दिखती। अस्पताल के बाहर खड़े सैकड़ों समर्थकों की आखों में आंसू बता रहे हैं कि वहां करुणानिधि की अहमियत क्या है। करुणानिधि साल 1957 में पहली बार विधानसभा पहुंचे थे।

एम करुणानिधि.(फोटो:गूगल)

साल 2007 में केंद्र में यूपीए की सरकार के वक्त रामसेतु का मुद्दा गरम था। इसी दौर में करुणानिधि ने राम पर सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने एक बयान में कहा, कहा जा रहा है कि 17 लाख साल पहले एक आदमी था, जिसका नाम राम था। उसके बनाए पुल को हाथ न लगाएं। कौन था ये राम? किस इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएट था? इसके सबूत कहां हैं? एक ऐसा शख्स जो एक विश्वास पर पीले कपड़े पहनता था, वह राम पर इस तरह के सवाल उठाए लोगों को चौकातै हैं, लेकिन करुणानिधि जानते हैं कि उनकी राजनीति किस पर टिकी है और वह उसी के अनुरूप आगे बढ़ते रहे।

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