डीयू में एमफिल-पीएचडी के परिणाम निराशाजनक, इतिहास विषय में 30 सीटों के लिए सिर्फ 3 स्टूडेंट्स पास

दिल्ली विश्वविद्यालय में एमफिल और पीएचडी के प्रवेश परीक्षा परिणाम चौंकाने वाले हैं। ईस्ट एशियन स्टडीज में दाखिले के लिए पीएचडी की प्रवेश परीक्षा देने वाले सभी छात्र फेल हो गए। विभाग में पीएचडी के लिए सात सीटें हैं। वहीं, डीयू के कई अन्य विभागों में भी सीटों की संख्या से कम छात्र प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए हैं।

50 फीसदी अंक पाना अनिवार्य : इस वर्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एमफिल और पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी अंक पाने की बाध्यता रखी है। इतना अंक पाने वाला ही उत्तीर्ण माना जाएगा।

यह नियम सभी श्रेणी के छात्रों के लिए है। डीयू के माडर्न इंडियन लैंग्वेज, डिपार्टमेंट ऑफ एडल्ट एजुकेशन, फारेंसिक साइंस, फिजिक्स डिपार्टमेंट, हिस्ट्री, फिलासफी सहित कई विभागों में सीटों की संख्या से बहुत कम छात्र प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए हैं। यह बेहद ही चिंता का विषय है।.

25 सीटों के लिए तीन छात्र पास : .अफ्रीकन स्टडीज के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि हमारे यहां बस तीन छात्र एमफिल की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए। जबकि कुल सीट 25 हैं। अंग्रेजी विभाग में दाखिला से जुड़े प्रो. अनिल अनेजा ने बताया कि हमारे यहां एससी और एसटी वर्ग में कोई छात्र एमफिल की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया है, लेकिन यह परिणाम विगत वर्ष की अपेक्षा चौंकाने वाला है। बहुत कम संख्या में छात्र परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए हैं। .

इससे कई विभागों के सामने यह परेशानी उत्पन्न हो गईहै कि उनकी सीटें कैसे भरेंगी। छात्र भी डीयू के परिणाम को देखकर बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।.

इतिहास में पीएचडी के लिए 30 सीटें है, लेकिन प्रवेश परीक्षा में मात्र 3 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। माडर्न इंडियन लैंग्वेज की एक छात्रा ने बताया कि विभाग में मात्र एक छात्र ने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है, जबकि हमारे यहां कुल 35 सीट हैं। इसमें से 16 सीट प्रवेश परीक्षा के आधार पर भरी जानी है। .

कुछ विभागों को यूजीसी के नियम की जानकारी नहीं होने के कारण उन्होंने पहले अपनी सूची लगा दी थी, लेकिन डीयू के निर्देश के बाद उन्हें दूसरी सूची जारी करनी पड़ी। ईस्ट एशियन स्टडीज की विभागाध्यक्ष डॉ. उनीता सच्चिदानंद ने बताया कि हमारे यहां 7 सीटें हैं, लेकिन किसी छात्र ने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। इसलिए हम सीटों को कैसे भरें, इसके लिए डीयू को पत्र लिखेंगे और डीयू द्वारा जारी निर्देश के अनुसार आगे फैसला लिया जाएगा।

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