ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनेगा दरभंगा, 56 साल बाद बिहार के इस लाल किले पर लहराया जाएगा तिरंगा

दरभंगा के लाल किले पर लगभग 56 साल के बाद एक बार फिर तिरंगा फहराया जाएगा। इसको लेकर तैयारी शुरू हो गई है। मिथिला स्टूडेंट्स युनियन के राष्ट्रीय महासचिव आदित्य मोहन झा ने बताया कि- दरभंगा के इस ऐतिहासिक धरोहर ‘लाल-किले’ पर इस 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को तिरंगा फहराया जाना चाहिए। यह मिथिला का ऐतिहासिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक धरोहर है जिसपर 1962 के बाद से कभी तिरंगा नहीं फहराए जाने की बात पता चली है। एक व्यक्ति ने बताया की एकबार बीच मे प्रयास भी हुआ था पर पूर्ण जानकारी नहीं है।

तीन साल पहले एमएसयू ने एकबार विचार किया था किंतु तब यह सम्भव नहीं हो पाया कुछ कारणों से। वैसे इसकी ऊंचाई और सीढ़ी की कमी के कारण इसके ऊपर तिरंगा फहरवाना कुछ मुश्किल जरूर है पर यदि कोशिश और पूर्व तैयारी हो तो शायद किया जा सकता है। मेरी ईच्छा है की इस स्वतंत्रता दिवस यहाँ एक बुजूर्ग स्वतंत्रता सेनानी के हाथों ध्वजारोहण हो। 1950 में यहाँ से दरभंगा महाराज ने अपना ध्वज हटाकर भारतीय गणतंत्र का तिरंगा ध्वज लहराया था किंतु 1962 के बाद फिर कभी यह ऐतिहासिक इमारत राष्ट्रीय दिवस के मौके पर भी भारतीय तिरंगा झंडा का लहराना न देख सका…आइए इस बार कोशिश करते हैं…जय मिथिला, जय हिंद


बताते चले कि दरभंगा शहर में बहुत सारी ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जिन्हें आज बचाने की जरुरत है। सही रख-रखाव के अभाव में ये बहुमूल्य धरोहरें धीरे-धीरे दम तोड़ती जा रही हैं। यहां के महाराजाओं ने बड़े ही शौक से भवनों व संग्रहालयों का निर्माण कराया। प्रशासनिक उदासीनता के कारण ये खत्म होने के कगार पर हैं। जनमानस को आज अपने पुराने इतिहास को बचाने की मुहिम चलानी चाहिए। ये जो राज का किला है, दिल्ली के लाल किले से कम नहीं है। फर्क बस यह है कि लाल किले का रख-रखाब किया जाता है और राज किले का नहीं।

आश्चर्य की बात तो देखिय, इसे ठीक करने के बजाय नगर निगम की ओर से यहां क्षतिग्रस्त का बोर्ड लगाकर लोगों को यहां से गुजरने के लिए मना किया जाता है। हम नागरिकों का यह कर्तव्य बनता है कि हम अपनी धरोहरों को संवारने के लिए आगे आएं। तभी जाकर प्रशासन और सरकार की भी नींद खुलेगी। अन्यथा सब बर्बाद हो जाएगा। दैनिक जागरण की ओर से चलाए जा रहे अभियान अपना शहर, अपना नजरिया के दौरान शहरवासियों ने कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए। बेलवागंज निवासी प्रमोद कुमार पाठक की मानें तो शहर के ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए सबको मिलजुल कर प्रयास करना चाहिए।

केवल नगर निगम और प्रशासन पर फेंक कर लोग अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते। कबीरचक के सोहन यादव की मानें तो ऐतिहासिक चीजों को बचाए जाने की मुहिम चलाई जानी चाहिए। इससे संबंधित जो विभाग भी है, वे क्रियाशील नहीं है। बेंता निवासी मोहन कुमार सिंह ने बताया कि यूं तो शहर में समस्याओं का मकड़जाल फैला हुआ है। समस्याओं को प्राथमिकताओं के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। कटहलबा़ड़ी के अनिल कुमार की मानें तो नगर निगम और वार्ड पार्षद दोनों को ही शहर के विकास से कोई मतलब नहीं है। केवल सरकारी योजनाओं में लूट-खसोट व्याप्त है। इसे सबसे पहले बंद करना होगा।

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