पर्यावरण के साथ सामंजस्य बैठानामानव की एक मूलभूत आवश्यकता है…..

बॉलीवुड की जानी पहचानी अभिनेत्री ने एक बार प्रकृति के लिए कहा था कि मां और प्रकृति में मात्र इतना ही अंतर है कि मां गलती करने पर माफ़ कर देती है पर प्रकति गलती करने पर माफ़ नहीं करती है.  

ये बात बिल्कुल सही है दोस्तों  प्रकृति सही रहती है बेहतर पर्यावरण से और पर्यावरण बेहतर रहता है नदी, पहाड़ और पेड़-पौधों  कि देख भाल से. इसलिए हमे पर्यावरण के साथ सामंजस्य बनाना जरुरी है

दोस्तों पर्यावरण के साथ सामंजस्य बैठानामानव की एक मूलभूत आवश्यकता है. अगर हमारे आस-पास शुद्ध हवा और पानी होगा तो हमारे स्वास्थ्य पर इसका अनुकूल असर रहेगा किन्तु  अगर पर्यावरण का ध्यान नहीं दिया गया तो इसका प्रतिकूल असर होगा. मानव का शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है.

ये तत्व है अग्नि, पृथ्वी, आकाश, जल और वायु. आपने कई बार ये महसूस किया होगा कि आप कितने भी थके क्यों हो आप जैसे ही खुली हवा या फिर पानी के छींटे अपने मुंह पर डालते है तो आपमें एक जोश और उत्साह आ जाता है. साथियों इसलिए हमे एक बेहतर पर्यावरण के निर्माण के लिए प्रकृति से  सामंजस्य बनाना होगा. वैसे भी हम संघाई और दिल्ली का हाल देख ही चुके है.

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