मोदी की फेकू सरकार : SBI ने 70 हजार बैंक कर्मियों से वापिस मांगा नोटबंदी में दिया ओवरटाइम का पैसा

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के 70 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों ने बैंक से उनके ओवरटाइम का पैसा लौटाने को कहा है। नोटबंदी के दौरान अधिकारियों ने रात-दिन एक करके काम किया था। यहां तक कि छुट्टी वाले दिन भी वे बैंक जाते थे जिससे उनका काफी ओवरटाइम लगा था, तब इन अधिकारियों और कर्मचारियों से वादा किया गया था कि उनके ओवर टाइम के लिए अतिरिक्त भुगतान दिया जाएगा। बैंक ने अपना वादा निभाया भी और इन कर्मचारियों को ओवरटाइम के लिए भुगतान किया गया लेकिन अब बैंक दिया हुआ पैसा वापिस मांग रहा है। दरअसल भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो चुके एसोसिएट बैंकों के 70,000 से ज्यादा कर्मचारियों को आदेश दिया गया है कि वे अतिरिक्त भुगतान के पैसों को वापिस करें। कर्मचारी इस आदेश के बाद बैंक से नाराज हैं।
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SBI का तर्क
एसबीआई ने अपने सभी जोनल हेडक्वार्टर को जो खत भेजा है उसमें लिखा है कि बैंक सिर्फ अपने कर्मचारियों को ही अतिरिक्त काम के लिए पैसा दें न कि पूर्व एसोसिएट बैंकों के कर्मचारियों को। एसबीआई ने पत्र में अपने सभी जोनल मुख्यालय को स्पष्ट लिखा है कि 2016 में नोटबंदी के दौरान ओवर टाइम के लिए एसोसिएट बैंक के कर्मचारियों को दिया गया पैसा वापस लिया जाए। अतिरिक्त भुगतान केवल उन कर्मचारियों के लिए था जो एसबीआई की शाखाओं में काम करते थे। बैंक ने कहा कि जब ओवर टाइम के लिए अतिरिक्त भुगतान की घोषणा की गई थी तब एसोसिएट बैंकों का विलय एसबीआई में नहीं हुआ था, इसलिए उनके कर्मचारी तकनीकी रूप से तब एसबीआई के कर्मचारी नहीं माने जाएंगे। इस कारण वे अतिरिक्त भुगतान के भी हकदार नहीं क्योंकि उन्होंने जो ओवर टाइम लगाया था उसका मुआवजा देने की जिम्मेदारी एसबीआई की नहीं। साथ ही एसबीआई ने कहा कि इन कर्मचारियों के भुगतान की जिम्मेदारी पांच बैंकों की थी नोटबंदी के दौरान स्वायत्त थे।
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इतना मिला था ओवरटाइम पर भुगतान
नोटबंदी के दौरान बैंकों के लाखों कर्मचारियों ने तब  हर दिन 3 से 8 घंटे तक अतिरिक्त काम किया था। इस ओवरटाइम के लिए अधिकारियों को 30,000 और अन्य कर्मचारियों को 17,000 रुपए तक का भुगतान किया गया था।
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2016 को लागू हुई थी नोटबंदी
8 नवंबर 2016 की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए नोटबंदी की घोषणा की थी। मोदी नोटबंदी के दौरान लोगों को पुराने नोट जमा कराने और नए नोट प्राप्त करने के लिए कहा गया था। नोटबंदी के समय न केवल आम जन ने बल्कि बैंक कर्मचारियों ने भी बड़े धैर्य से काम किया था। पुराने नोट जमा करनाने और नए नोट लेने के लिए लोग सुबह से ही बैंक के बाहर लाइनों मे खड़े हो जाते थे। बैंक कर्मचारी भी तब देर रात तक काम करते थे। नोटबंदी को लेकर देशभर में खासी हलचल पैदा हो गई थी।

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