अमेरिका ने कल किया सबसे शक्तिशाली ग्रैविटी बम का परीक्षण

जीपीएस गाइडेड अत्याधुनिक ग्रैविटी बम जिस पर 2008 से काम किया जा रहा था का अमरीकी एयरफोर्स और डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के नेशनल न्यूक्लियर सिक्युरिटी ऐडमिनिस्ट्रेशन (एनएनएसए) ने परिक्षण कर लिया है. इसे B 61-21 नाम से जाना जायेगा जो एक ग्रैविटी बम है. यह फटने से पहले धरती के तीन फीट भीतर तक जाने की ताकत रखता है. सकता है. एनएनएसए के एक रिलीज़ के अनुसार डिपार्टमेंट ने दो गैर-न्यूक्लियर सिस्टम क्वालीफिकेशन फ्लाइट टेस्ट किए हैं.

एनएनएसए के प्रिसिंपल असिस्टेंट डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर जनरल माइकल ग्रेग ने कहा ये दोनों क्वालीफिकेशन टेस्ट देश की सुरक्षा ज़रुरतों की पूर्ति करेगा. परिक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है, इस प्रोग्राम का उद्देश्य बम की सर्विस लाइफ को बढ़ाना था. रिपोर्ट के अनुसार, यह अपनी तरह का पहला टेस्ट है. ग्रैविटी बम हथियारों को तीन गुना ज़्यादा सटीकता देगा. इसके पहले एफ-15 ई स्ट्राइक ईगल और एफ-16 फाइटिंग फाल्कन का भी टेस्ट किया गया. बी-61 के साथ ही एफ-35 का भी टेस्ट किया गया जो कि जल्दी ही एक और विकल्प के रूप में उपलब्ध होगा.

हालांकि इस कदम की आलोचना भी की जा रही है और अमेरिकन वैज्ञानिक फेडरेशन ने इसकी निंदा की है. बराक ओबामा के शासन काल में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट (न्यूक्लियर के आधुनिकीकरण प्रोग्राम ) को प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने 30 साल मतलब 2046 तक बढ़ा दिया है जिस पर कुल 1.2 ट्रिलियन डॉलर खर्च किये जायेंगे.

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