उच्च पदों पर भारत में भी सीमा अवधि होनी चाहिए: ज्योतिरादित्य सिंधिया

लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक एवं वरिष्ठ पार्टी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर एक व्यक्ति के लिए निर्धारित दो कार्यकाल की सीमा वाली प्रणाली का समर्थन करते हुए शनिवार को कहा कि हमारे देश में भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री जैसे उच्च पदों पर रहने वाले व्यक्ति के लिए सीमा अवधि नियत होनी चाहिए.

सिंधिया ने कहा, ‘अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर रहने वाले व्यक्ति के लिए दो कार्यकाल की समयावधि निश्चित है. इसी प्रकार हमारे देश में भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे उच्च पदों पर रहने वाले व्यक्ति के लिए सीमित कार्यकालों की संख्या निश्चित होना चाहिए.’

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश और केन्द्र सरकारों द्वारा उच्च अधिकारियों को सेवावृद्धि देने और संविदा पर नियुक्त करने की नीति का विरोध करते हुए कहा, ‘सामान्य तौर पर भी मैं उच्च अधिकारियों के सेवाकाल में वृद्धि की नीति के विरूद्ध हूं लेकिन यदि सरकार यह चुनाव के आसपास करती है तब तो इसमें षड्यंत्र की बू आती है.’ उन्होंने कहा कि जिसका कार्यकाल समाप्त हो चुका है, उसे सेवानिवृत्त होकर अगले आदमी को मौका देना चाहिए.

सिंधिया ने मंदसौर में आठ साल की बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार और भोपाल जिले के बैरसिया में एक दलित किसान को दबंगो द्वारा जिंदा जलाकर मारने की घटनाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं और दलितों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हुई है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पिछले साल 6 जून को मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए 6 किसानों की मौत की घटना पर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में पुलिस को क्लीन चिट दिए जाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया कि फिर छह किसानों की मौत का जिम्मेदार आखिरकार कौन है.

कांग्रेस में वंशवाद के बारे में पूछे गये सवाल पर सिंधिया ने कहा, ‘विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र होने के नाते, जब हम यहां वंशवाद की बात करते हैं तो अपने प्रजातंत्र पर ही काला धब्बा लगाते हैं.’ उन्होंने मौजूद पत्रकारों से सवाल किया कि जब डाक्टर का बेटा डाक्टर, उद्योगपति का बेटा उद्योगपति बनने पर और पत्रकार के बेटे के पत्रकार बनने पर कोई सवाल नहीं उठता तो राजनेता के बेटे पर जनसेवा के लिये राजनीति में आने पर वंशवाद का सवाल क्यों उठाया जाता है.

सिंधिया ने कहा, ‘जनसेवा करने के लिए हम सब हर पांच साल में संग्राम (चुनाव) की आग से निकल कर आते हैं, कोई ऊपर से नहीं आते तो फिर एक राजनेता का पुत्र होना कोई गुनाह तो नहीं है.’

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