एक ही रात में कई वारदात को देते थे अंजाम, इंटरनेट से सीखकर 500 कार चुराने वाले गिरफ्तार

उत्तरी जिले के स्पेशल स्टाफ ने गुरुवार को वाहन चोरी में लिप्त अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तिमारपुर से तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की दस कारें भी बरामद की हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी दो साल में दिल्ली से करीब 500 कार चुराकर मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बेच चुके हैं। आरोपी मेरठ के रहने वाले हैं और वे दिल्ली आकर एक रात में तीन से चार कार चुराकर लौट जाते थे।

डीसीपी नुपूर प्रसाद ने बताया कि इलाके में बढ़ती वाहन चोरी की वारदातों को रोकने के लिए स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर सुनील शर्मा के नेतृत्व में एसआई संजय कुमार गुप्ता की टीम गठित की गई थी। 2 अगस्त को हेड कांस्टेबल दीपक को सूचना मिली कि वाहन चोरी में लिप्त कुछ युवक तिमारपुर इलाके में घूम रहे हैं।

सूचना के आधार पर एसआई संजय, एएसआई नरेश, हेडकांस्टेबल अमित और कांस्टेबल अजय की टीम ने तिमारपुर में कार से घूम रहे तीन युवकों को रोका। जांच में मालूम हुआ कि जिस कार में युवक घूम रहे हैं, उसे गुलाबी बाग से चुराया गया था। इसके बाद पुलिस ने तीनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया, जिनकी पहचान मोहसिन, शहजाद और असलम के तौर पर हुई।

वाहन गोदाम में रखे : पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे उत्तर, मध्य, उत्तर पश्चिम एवं रोहिणी इलाकों में वाहन चोरी करते थे। इसके बाद आरोपियों की निशानदेही पर एएसआई विनोद और एएसआई नरेश की टीम ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के एक गोदाम से नौ कार बरामद कीं, जिन्हें दिल्ली के विभिन्न इलाकों से चुराया गया था। इसके अलावा इनकी निशानदेही पर चाभी के सेट के साथ 12 ईसीएम प्लेट, कारों की 52 चाभियां, स्कैनर और वाहनों के कागज बरामद किए गए।

दो मिनट में वारदात : आरोपियों ने बताया कि ये जब भी दिल्ली आते थे तो इनका लक्ष्य एक रात में तीन से चार वाहन चुराने का रहता था। ये महज दो मिनट में किसी भी कार या एसयूवी का ताला खोल लेते थे। ये चोरी की कार सीधे मेरठ या मुरादनगर के ठिकानों पर पहुंचा देते थे। आरोपी बीते दो साल में करीब 500 कारों की चोरी कर चुके हैं।

पहले वाहनों से स्टीरियो चुराता था
आरोपी मोहसिन अशफाक नाम के युवक के साथ पहली बार दिल्ली आया था। तब दोनों कार से स्टीरियो चोरी करते थे। इस बीच उसकी मुलाकात गुड्डू से हुई, जिसने उसे कार चोरी करने का तरीका बताया। इसके बाद वह शहजाद, असलम व गुलफाम के साथ कार चोरी करने लगा।

इंटरनेट से तरीका सीखा
आरोपियों ने इंटरनेट के जरिए ईसीएम और स्कैनर से वाहन चोरी करने के गुर सीखे। ये वाहन चोरी करने के लिए ईसीएम या बीसीएम/डीसीएम या फिर स्कैनर का प्रयोग करते थे। कुछ कंपनियों के वाहनों के लॉक स्कैनर से खुलते थे। ये कार के अंदर प्रवेश कर तारों को स्कैनर से जोड़ते थे और फिर उसके सॉफ्टवेयर में बदलाव कर लॉक को निष्क्रिय कर देते थे। इसके बाद वाहन किसी भी चाभी से स्टार्ट हो जाता है, लेकिन महंगी कारों को स्टार्ट करने के लिए उनका ईसीएम बदलना पड़ता था। इसके लिए आरोपी ईसीएम और उसके अनुरूप बनी चाभी लेकर चलते थे। जब मौका मिलता था, तब ये कार का ईसीएम बदलकर उसे स्टार्ट कर लेते थे।

मांग के आधार पर चोरी
आरोपी मांग के आधार पर वाहन चोरी करते थे। पुरानी कारों को मेरठ के कबाड़ी बाजार में बेच देते थे। ये वाहन डेढ़ लाख से लेकर तीस हजार रुपये में गुड्डू नाम के खरीदार को बेचते थे। गुड्डू दुर्घटना में पूरी तरह नष्ट हो चुके वाहनों के चेसिस और इंजन नंबर के आधार पर कागजात बनवाता था और फिर वैसा ही वाहन इनसे चुराने के लिए कहता था। ऐसे वाहनों को पूर्वोत्तर के राज्यों में बेच दिया जाता था। पुलिस गुड्डू सहित अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

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