जानिए-शारीरिक संबंध का ज्यादा सुख किसे प्राप्त है ? महिला या पुरुष को

किसी भी रिश्ते में अंतरंगता जरूरी होती है. ऐसा कहा जाता है कि जहां पुरुष दिन में कई बार शारीरिक संबंध का आनंद लेना चाहते हैं. वहीं एक सच्चाई यह भी है कि महिलाएं भी पुरुषों की तरह ही आनंदित होती हैं. लेकिन सबसे बड़ा रहस्य यह है कि महिला या पुरुष में से इस क्रिया में किसे ज्यादा आनंद मिलता है? शायद आप इस प्रश्न का उतर जानकर हैरान रह जाएंगे.इसका उतर जानने के लिए इस लेख को अंत तक पढ़ें.

जानिए-शारीरिक संबंध का ज्यादा सुख किसे प्राप्त है ? महिला या पुरुष को

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महाभारत के अनुशासन पर्व में मनुष्य जीवन से जुडी कई पहलुओं पर चर्चा है. युधिष्ठिर को एक सवाल काफी लंबे समय से परेशान कर रहा था. शरशैय्या पर लेटे मौत की प्रतीक्षा करते भीष्मपितामह से युधिष्ठिर ने यह सवाल पूछा कि शारीरिक संबंध के दौरान ज्यादा आनंद किसे प्राप्त होता है ?महिला को या पुरुष को.

तो भीष्मपितामह ने उत्तर दिया- इस सवाल का उत्तर देना कठिन है जब तक कि महिला और पुरुष दोनों का अनुभव किसी को एक साथ ना हो. फिर भीष्मपितामह ने कहा- युधिष्ठिर तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर भंगस्वाना और सकरा की कथा के जरिए ही दिया जा सकता है. अपने सवाल का जवाब पाने के लिए यह कथा सुनो.

बहुत समय पहले भंगस्वाना नाम का एक राजा हुआ करता था. वह न्यायप्रिय और यशस्वी था लेकिन उसके कोई बेटा नहीं था. पुत्र की चाहत में उस राजा ने ‘अग्नीष्टुता’ अनुष्ठान किया. हवन में केवल अग्नि देवता का आदर हुआ था इसलिए देवराज इन्द्र काफी नाराज और क्रोधित हो गए.

इन्द्र अपने गुस्से को निकालने के लिए दंड देना चाह रहे थे. एक दिन राजा शिकार पर निकला तो इन्द्र ने राजा को सम्मोहित कर दिया. राजा भंगस्वाना जंगल में इधर-उधर भटकने लगा. अपनी सम्मोहित हालत में वह सब सुध खो बैठा, ना उसे दिशाएं समझ आ रही थीं और ना ही अपने सैनिक नहीं दिख रहे थे. भूख-प्यास ने उसे और व्याकुल कर दिया था. अचानक उसे एक छोटी सी नदी दिखाई थी जो किसी जादू सी सुन्दर लग रही थी. राजा उस नदी की तरफ बढ़ा और पहले उसने अपने घोड़े को पानी पिलाया और फिर खुद भी पानी पिया.

जैसे ही राजा भंग्स्वाना नदी ने नदी के अंदर प्रवेश किया और पानी पिया उसने देखा की वह बदल रहा है. धीरे-धीरे वह एक महिला के रूप में बदल गया. अब वह राजा शर्म से बोझल होकर जोर-जोर से विलाप करने लगा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा उसके साथ क्यों और कैसे हुआ.

राजा भंगस्वाना सोचने लगा – “हे प्रभु! पुरुष से महिला बन जाने के बाद मैं राज्य की जनता को क्या मुंह दिखाऊंगा? मेरे अग्नीष्टुता’ अनुष्ठान से मेरे 100 पुत्र हुए हैं. उनका सामना कैसे करूंगा, क्या कहूंगा? मेरी रानी, महारानी जो मेरी प्रतीक्षा कर रहीं हैं, उनसे कैसे मिलूंगा? मेरे पौरुष के साथ-साथ मेरा राज-पाट सब हाथ से चला जाएगा.

लेकिन राजा क्या करते महिला के रुप में जब राजा वापस पँहुचा तो उसे देख कर सभी लोग हैरान रह गए. राजा ने सभा बुलाई और फैसला सुनाते हुए कहा कि वह अब राजपाट छोड़कर बाकी जीवन जंगल में बिताएंगे.

ऐसा कह कर वह राजा जंगल की तरफ चला गया. वहां जाकर वह स्त्री रूप में एक तपस्वी के आश्रम में रहने लगी. जिनसे उसने कई पुत्रों को जन्म दिया. अपने उन पुत्रों को वह अपने पुराने राज्य ले गयी और अनुष्ठान से हुए बच्चों से कहा- तुम मेरे पुत्र हो जब मैं एक पुरुष था, ये मेरे पुत्र हैं जब मैं एक स्त्री हूँ. तुम लोग मेरे राज्य को मिलजुल कर संभालो. उसके बाद सभी भाई मिलकर रहने लगे.

सब को सुख से जीवन व्यतीति करता देख, देवराज इन्द्र को क्रोध आ रहा था. उनमें बदले की भावना फिर उत्पन्न होने लगी. इन्द्र सोचने लगा कि राजा को स्त्री मैं बदल कर मैंने उसके साथ बुरे की जगह अच्छा कर दिया है. ऐसा कह कर इन्द्र ने एक ब्राह्मण का रूप धरा और राजा भंगस्वाना के राज्य में पहुच गया. वहां जाकर उसने सभी राजकुमारों को भड़का दिया.

इन्द्र के भड़काने की वजह से सभी भाई आपस में झगड़ पड़े और एक दूसरे को मार डाला. जैसे ही भंगस्वाना को इस बात का पता चला वह दुखित हो गया और रोने लगा. ब्राह्मण के रूप में इन्द्र राजा के पास पहुंचा और पूछा की वह क्यूँ रो रही है. भंगस्वाना ने रोते रोते पूरी घटना इन्द्र को बताई तो इन्द्र ने अपना असली रूप धारण कर राजा को उसकी गलती के बारे में बताया.

इन्द्र ने कहा- “क्यूंकि तुमने सिर्फ अग्नि को पूजा और मेरा अनादर किया इसलिए मैने तुम्हारे साथ यह खेल खेला है.” यह सुनते ही भंगस्वाना इन्द्र के पैरों में गिर गया और अपने अनजाने में किया अपराध के लिए माफ़ी मांगी. राजा की ऐसी दयनीय दशा देख कर इन्द्र को दया आ गई. इन्द्र ने राजा को माफ करते हुए अपने पुत्रों को जीवित करवाने का वरदान दिया.

इन्द्र बोले- “हे स्त्री रूपी राजन, अपने बच्चों में से किन्ही एक को जीवित कर लो” भंगस्वाना ने इन्द्र से कहा अगर ऐसी ही बात है तो मेरे उन पुत्रों को जीवित कर दो जिन्हे मैने स्त्री की तरह पैदा किया है. इन्द्र हैरान हो गए. ने इसका कारण पूछा तो राजा ने जवाब दिया-“हे इन्द्र! एक स्त्री का प्रेम, एक पुरुष के प्रेम से बहुत अधिक होता है इसीलिए मैं अपनी कोख से जन्मे पुत्रों का जीवन-दान मांगती हूँ.

राजा के सभी पुत्रों को जीवित कर दिया. उसके बाद इन्द्र ने राजा को दुबारा पुरुष रूप देने की बात की. इन्द्र बोले, “तुमसे खुश होकर हे भंगस्वाना मैं तुम्हे फिर से पुरुष बनाना चाहता हूँ” परन्तु राजा ने पुरुष बननेसे इंकार कर दिया.

स्त्री रूपी भंगस्वाना बोला, “हे देवराज इन्द्र, मैं स्त्री रूप में ही खुश हूँ और स्त्री ही रहना चाहता हूँ” यह सुनकर इन्द्र उत्सुक हो गए और पूछ बैठे कि राजन, क्या तुम आपस पुरुष बनकर अपना राज-पाट नहीं संभालना चाहते?”

भंगस्वाना बोला-“क्यूंकि शारीरिक संबंध के समय महिला को पुरुष से कई गुना ज़्यादा आनंद, तृप्ति और सुख मिलता है इसलिए मैं स्त्री ही रहना चाहूंगा.” इन्द्र ने “तथास्तु” कहा और वहां से चल दिए.

भीष्म बोले, “हे युधिष्ठिर, यह बात स्पष्ट है की महिला को सम्बंधों के समय पुरुष से ज़्यादा सुख मिलता है और स्त्री पुरुष से कई गुणा संवेदनशील होती हैं.

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