जानिए कैसे होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार

किन्नरों की शव यात्राएं रात्रि को निकाली जाती है शव यात्रा को उठाने से पूर्व जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है । किन्नर के मरने उपरांत पूरा हिंजड़ा समुदाय एक सप्ताह तक भूखा रहता है. किन्नर समुदाय समाज से अलग ही रहता है और इसी कारण आम लोगों में उनके जीवन (life) और रहन-सहन को जानने की जिज्ञासा (Curiosity) बनी रहती है. पुराने समय में भी किन्नर राजा-महाराजाओं के यहां नाचना-गाना करके अपनी जीविका चलाते थे. आपकी जानकारी के लिए बता दें महाभारत (Mahabharata) में जब पांडव एक वर्ष का अज्ञात वास काट रहे थे, तब अर्जुन (Arjun) एक वर्ष तक किन्नर वृहन्नला बनकर रहा था और वृहन्नला (अर्जुन) ने उत्तरा को नृत्य और गायन की शिक्षा दी थी.

ये बात तो आप सभी जानते ही है कि किन्नर की दुआएं किसी भी व्यक्ति के बुरे समय को दूर कर सकती हैं. धन लाभ चाहते है तो किसी किन्नर से एक सिक्का लेकर पर्स में रखे.  किसी किन्नर की मृत्यु (death) के बाद उसका अंतिम संस्कार बहुत ही गुप्त तरीके से किया जाता है. किन्नरों की जब मौत होती है तो उसे किसी गैर किन्नर को नहीं दिखाया जाता क्यूँकि ऐसा होने पर ये माना जाता है कि ऐसा करने से मरने वाला अगले जन्म में भी किन्नर ही पैदा होगा। किन्नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं यानी वे हिंदू रीति रिवाजों का पालन करते हैं ।

कोई भी किनर ये नहीं चाहता कि उसके साथी को दोबारा ऐसा नरक के जैसा जीवन मिले इसलिए मरने पर उसके शव की इज़्ज़त नहीं की जाती बल्कि लताड़ा जाता है , ऐसा नहीं है कि उसके साथियों को दुःख नहीं होता पर इससे भी बड़ा दुःख किसी के किनर या हिजड़ा होने का होता है । सच में देखा जाए तो जीवन एक गहरे दुःख में गुज़रता है जिसमें ना कोई उमंग होती है और ना कोई इच्छा पर आपने देखा होगा ये लोग हमेशा हँसते रहते हैं क्यूँकि ये दुनिया को दिखाते हैं कि किसी चीज़ की ज़िंदगी में कमी होने पर उसके अफ़सोस सा ग़म में डूबने की बजाय ज़िंदगी जीने का आनंद उठाना चाहिए ।

Facebook Comments