महाभारत के अंत में दुर्योधनने श्रीकृष्ण को इशारे करते हुए क्या कहा की कृष्ण..

महाभारत के युद्ध में कृष्ण के इशारे करने पर भीम ने दुर्योधन की जंघा उतार दी थी। इसलिए वह खून में लथपथ होकर रणभूमि पर गिरा हुआ था। भूमि पर गिरे हुए ही दुर्योधनने श्रीकृष्ण की ओर देखते हुए अपने हाथ की तीन अंगुलियों को बार-बार उठाकर कुछ बताने का प्रयास किया। ऐसा करने पर श्रीकृष्ण उसके पास गए और कहने लगे कि क्या तुम मुजे कुछ कहना चाहते हो?

तब दुर्योधनने कहा कि उसने महाभारत युद्ध के दौरान तीन गलतियां की हैं, और इन्हीं गलतियों के कारण वह युद्ध नहीं जीत सका और उसका यह हाल हुआ है। यदि वह पहले से ही इन गलतियों को पहचान लेता, तो आज जीत का ताज उसके सिर होता, और उसकी इस तरह पराजय न हुई होती।

श्रीकृष्ण ने बड़ी ही सहजता से दुर्योधन से उसकी उन तीन गलतियों के बारे में पूछा तो उसने बताया, पहली गलती यह थी कि उसने स्वयं नारायण यानि की श्रीकृष्ण के स्थान पर उनकी नारायणी सेना को चुना। दूसरी गलती उसने यह बताई की कि अपनी माता के लाख बार कहने पर भी वह श्रीकृष्ण की बातो में आकर उनके सामने पेड़ के पत्तों से बना लंगोट पहनकर गया। तीसरी गलती यह थी कि उसने युद्ध में आखिर में जाने की भूल की। यदि दुरोधन युद्ध में पहले ही जाता तो कई बातों को समझ सकता था और शायद उसके भाई, मित्रों और कई लोग की जान बच सकती थी।

दुर्योधन की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने विनम्रता से दुर्योधन से कहा की, ‘तुम्हारी हार का मुख्य कारण तुम्हारा अधर्मी व्यवहार और अपनी ही कुलवधू का वस्त्राहरण करवाना था। तुमने स्वयं अपने कर्मों से अपना भाग्य लिखा। यदि तुम ऐसा न करते तो आज तुम्हारे साथ ऐसा ण हुआ होता।

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