लाखों की नौकरी छोड़ इस लड़की ने शुरू किया कोराबार, घर की छत पर उगाती है सब्जी

पढ़ाई पूरी करने के बाद दोस्ते की मदद से प्रियंका ने 75 हजार रुपए में आईखेती की शुरआत की। फिलहाल ये संगठन मुंबई और पुणे में सक्रिय है और देशभर में जैविक खाद की आपूर्ति करता है।
भारत में जैविक खेती की परंपरा को बनाए रखने का जिम्मा मुंबई की प्रियंका अमर शाह ने उठाया है। साल 2012 में उन्होंने इसकी पहल की थी, लेकिन अब ये एक बड़ा रूप ले चुका है।
वेलिंगकर इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में एमबीए के बाद प्रियंका ने आईखेती नामक संगठन की नींव रखी, जो देशभर में जैविक खाद की आपूर्ति करता है। इतना ही नहीं, ये संगठन शहरों में कम साधनों में जैविक खेती की सलाह देता है।
27 साल की प्रियंका 4 साल आईटी सेक्टर में काम किया। लेकिन इसके बाद वो अपना कारोबार करने की सोचने लगीं। इससे पहले उन्होंने एमबीए में दाखिला लिया और कॉलेज में जैविक खेती का आइडिया पेश किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोस्ते की मदद से प्रियंका ने 75 हजार रुपए में आईखेती की शुरआत की। फिलहाल ये संगठन मुंबई और पुणे में सक्रिय है और देशभर में जैविक खाद की आपूर्ति करता है।
आईखेती की सेवाएं तीन हिस्सों में बंटी हुई हैं। एक तो आईखेती मुंबई और पुणे में कैंप लगाता है और लोगों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करता है। जबकि दूसरी श्रेणी में खेती में मदद के लिए माली की सेवा देना। आईखेती उन लोगों के पास कर्मचारी भेजते हैं, जो जैविक खेती करते हैं। ये कर्माचारी बागवानी की साफ-सफाई करते हैं। जबकि तीसरा सेवा के तहत आईखेती आर्गेनिक खाद और बीज की देशभर में सप्लाई करता है।
आईखेती की टीम पहले 300 और 500 लीटर के दो ड्रम रखती है। इस ड्रमों में गीले कचरे से खाद बनाया जाता है। इन ड्रमों को दिन में दो बार घुमाया जाता है।  300 किलोग्राम गीले कचड़े से एक महीने में 30 किलो खाद तैयार होता है। इसका इस्तेमाल किचन गार्डेन में किया जाता है।
प्रियंका की इस कोशिश से मुंबई और पुणे में 5000 से ज्यादा घरों ने आर्गेनिक फार्मिंग को अपनाया है। जिसमें 40 से ज्यादा संगठन, स्कूल, मंदिर, चर्च शामिल हैं। इसके जरिए छत और बालकनी में गोभी, हरी मिर्च, टमाटर, लौकी, बैंगन उगाई जा रही है।
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