Lifestyle : क्या आप भी 9 से 5 वाली नौकरी से हो रहे हैं बोर?

नौकरी करना आज हर किसी को बंधवा मजदूरी लगने लगा है। खासकर प्राइवेट नौकरी करने वालों को ऑफिस में ज्यादा समय देना या एक ही टाईम पर आना-जाना बोर लगने लगा है। लोग 9 बजे जाने, 5 बजे आने वाली नौकरी से बोर हो रहे हैं। उन्हें ऐसी नौकरी चाहिए, जिसमें अपनी सुविधा से आने-जाने का वक्त तय कर सकें। रिसर्च की भाषा में कहा जाए तो फिक्स वर्किंग आवर्स नहीं, फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स चाहिए।

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ये नतीजा ब्रिटेन में हुए सर्वे से निकला है। यू-जीओवी नाम की एजैंसी ने ब्रिटेन के 5 हजार से ज्यादा कर्मचारियों पर सर्वे किया। सर्वे के मुताबिक-लोग ऑफिस में पूरे 8 घंटे देने में तो कोताही नहीं कर रहे, लेकिन रोज एक ही वक्त पर आना-जाना उन्हें पसंद नहीं आ रहा। सिर्फ 6% लोग ही इस तरह काम करना पसंद कर रहे हैं। बाकी 94% लोग चाहते हैं कि वो दिन में किसी भी वक्त आकर अपने 8 घंटे की ड्यूटी पूरी कर सकें। ब्रिटेन ही नहीं, अन्य देशों में भी ये नया वर्क कल्चर पसंद किया जा रहा है। दरअसल ब्रिटेन में 9 से 5 बजे की ऑफिस टाइमिंग को आदर्श माना जाता है, लेकिन 37% लोग चाहते हैं कि वो 8 बजे ऑफिस पहुंचकर 4 बजे छुट्‌टी पा लें। ब्रिटेन में तो लेबर लॉ भी कहता है कि- नौकरी में 26 हफ्ते पूरे करने के बाद कर्मचारी फ्लेक्सिबल वर्किंग टाइम की मांग कर सकता है।

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8 से 4 बजे की ऑफिस टाइमिंग सबसे पसंदीदा 37% लोगों को सुबह 8 से 4 बजे की ऑफिस टाइमिंग पसंद है। 21%लोग चाहते हैं- सुबह 7 बजे ऑफिस जाएं, 3 बजे आ जाएं। 10%लोग सुबह 9 बजे ऑफिस जाकर 5 बजे आना चाहते हैं। 8% लोग तो सुबह 9 बजे के भी बाद ऑफिस जाना चाहते हैं। 208 साल पहले ब्रिटिश मजदूर यूनियन ने 8 घंटे काम का नियम बनवाया काम करने के समय को लेकर 1810 तक तो दुनिया में कोई नियम ही नहीं था। 1810 में ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति के दौरान रॉबर्ट ओएन ने काम के घंटों को सीमित करने की मांग रखी। नतीजतन- 1810 में तय हुआ कि ब्रिटेन में हर कर्मचारी अब 10 घंटे ही काम करेगा। इसके बाद 1817 में इस समय को घटाकर 8 घंटे कर दिया गया। 1856 तक ये नियम सिर्फ ब्रिटेन में था। फिर धीरे-धीरे दुनिया के बाकी हिस्सों में भी 8 घंटे काम का नियम लागू होने लगा।

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96 साल पहले फोर्ड के मालिक ने 9 से 5 काम का कॉन्सेप्ट दिया 
फोर्ड कार कंपनी के मालिक हेनरी फोर्ड ने 1922 में अपनी कंपनी में 9 से 5 बजे तक काम करने का नियम सबसे पहले लागू किया था। हेनरी का मानना था कि शाम 5 बजे दफ्तर से छुट्‌टी पाने से उनके कर्मचारी परिवार के साथ रोज बेहतर शाम बिता पाएंगे और इसका सकारात्मक असर उनके अगले दिन के काम पर दिखेगा। बाद में ‘5-डे वर्किंग’ का कॉन्सेप्ट देने वाली भी फोर्ड पहली कंपनी बनी। 1926 में हेनरी ने 5 दिन काम-2 दिन आराम का नियम बनाया।

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