लोको पायलट को कैसे पता चलता हैं कि ट्रेन को किस ट्रैक पर ले जाना हैं

लोको पायलट को किस ट्रैक पर जाना है अगर आप क्वेश्चन का आंसर एक लाइन में सुनना चाहते हैं तो उसका जवाब दिया है कि लोको पायलट को यह नहीं पता होता कि उन्हें किस ट्रैक पर जाना है सच यही है कि उन्हें ट्रक से कोई मतलब नहीं होता 3GP ट्रेक्टर होकर जाती है.

लोको पायलट को कैसे पता चलता हैं कि ट्रेन को किस ट्रैक पर ले जाना हैं

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वह उसे आवाज करते जाते हैं कि ट्रक में कोई गड़बड़ी ना हो बसवा सिग्नल का पालन करते हैं और उनके पैर की जो सिग्नल मिलती है उस के अकॉर्डिंग वह आगे बढ़ते हैं और स्पीड को मैं करते हैं अगर सिंग्नल रेड होती है तुम्हें रूकना है सिग्नल येलो होती है.

तो उन्हें 30 किलोमीटर पर आवर की स्पीड से आगे बढ़ना है स्लो होने पर 50 किलोमीटर तक चल सकते हैं और ग्रीन मिलने पर वह अपनी स्पीड में आगे जा सकते हैं लेकिन कुछ सिचुएशन ऐसी होती है जब उन्हें पता होता की ट्रेन किस लाइन पर जा रही है.

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यही स्थिति लूप लाइन पर होती है जब ट्रेन मेल लाइन से कटकर रूट पंजाबी है यहां पर उन्हें सिग्नल के ताजा रूट इंडिकेटर का ध्यान रखना पड़ता है जिस लाइन के लिए उनकी रूट सेट होती है उस इंडिकेटर को देखकर उन्हें पता चल जाता है लेकिन ट्रैक ऑलरेडी पहले से ही सेट होती हैं.

उनको यहां पर भी किस बात से कोई मतलब नहीं होता उनका बस इतना काम होता है कि लोकोमोटिव के मौसम को सुरक्षित कंट्रोल करना ही काम हैं. तो आज का यही आर्टिकल हैं अच्छा लगे तो एक लाइक तो बनता हैं मेरे भाई.

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