महंगाई के आंकड़े तो आप भारत में भी हर तीन महीने पर पढ़ते होंगे, लेकिन वेनेजुएला की स्थिति चौंकाने वाली है। इस दक्षिण अमेरिकी देश में महंगाई का स्तर इतना बढ़ गया है कि टोकरियों नोट देकर लोग एक किलो मीट खरीद पा रहे हैं। इस हाइपर महंगाई से निपटने के लिए वेनेजुएला की सरकार ने नोटों से 5 जीरो हटाने का फैसला लिया है यानी 5 लाख बोलिवर ये की करंसी अब महज 5 बोलिवर के बराबर होगी। वेनेजुएला में नोटों को लोग कहीं कूड़े में फेंक रहे हैं तो कहीं एक किलो मीट के लिए टोकरियों नोट खर्च किए जा रहे हैं। ऑइल रिच देश में नोट जहां-तहां बिखरे नजर आ रहे हैं। कच्चे तेल के मामले में दुनिया के समृद्ध देशों में से एक वेनेजुएला की इकॉनमी ढहने के कगार पर है। इस साल के अंत तक वेनेजुएला में न्यूनतम मजदूरी में 3,000 फीसदी और महंगाई में 1,00,000 पर्सेंट का इजाफा होने की आशंका है। इससे समझा जा सकता है कि वेनेजुएला में हालात कितने खराब हो सकते हैं। ध्वस्त होती इकॉनमी को संभालने के लिए सरकार ने करंसी नोटों में से 5 जीरो हटाने का फैसला लिया है। प्रेजिडेंट निकोलस मादुरो ने यह भी ऐलान किया है कि वह स्थितियों में सुधार के लिए पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के दामों में इंटरनैशनल मार्केट के मुताबिक इजाफा करेंगे। हालांकि जानकारों का कहना है कि इससे परिस्थितियों और खराब होंगी। इन हालातों के विरोध में विपक्षी नेताओं ने मंगलवार को राष्ट्रव्यापी बंद बुलाया है। इन लोगों ने मादुरो की सोशलिस्ट सरकार के खिलाफ लोगों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है यही नहीं सोमवार को पूरे वेनेजुएला में बैंक भी बंद थे ताकि नए करंसी नोटों को जारी किया जा सके। मादुरो ने लगभग फ्री में मिल रहे पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के दामों को इंटरनैशनल मार्केट के अनुसार तय करने को कहा है। कम दाम होने के चलते अन्य देशों में इनकी तस्करी की जा रही है। मादुरो ने शुक्रवार को न्यूनतम मजदूरी में भी इजाफा करने की बात कही थी। हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन उपायों के बाद भी समस्या का हल होने की बजाय महंगाई में और अधिक इजाफा होगा।

किसी के पास अरबों की दौलत हो और उसे खर्च करने का हक न हो तो वह कैसा महसूस करता होगा? टाटा संस में हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी ग्रुपल के चेयरमैन पालोनजी शापूरजी मिस्त्री से यह सवाल पूछा जा सकता है। अरबपति पालोनजी की कुल 20 अरब डॉलर यानी 1,30,940 करोड़ रुपए की संपत्ति का 84 फीसदी हिस्सा टाटा संस के साथ कानूनी विवाद में फंसा हुआ है। बोर्डरूम में उठापटक के चलते 2016 में शापूरजी मिस्त्री के बेटे साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटा दिया गया था।

इसके बाद से ही मिस्त्री फैमिली और टाटा ग्रुप के बीच कानूनी विवाद चल रहा है। मिस्त्री टाटा संस के सबसे बड़े शेयरहोल्डर हैं। 100 अरब डॉलर की पूंजी वाले टाटा ग्रुप के खिलाफ मिस्त्री ने कई कानूनी परिवाद दायर किए हैं, जिनमें गवर्नेंस लैप्स समेत कंपनी के बोर्ड में फेरबदल को लेकर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं।

कोर्ट में जारी इस जंग के बीच टाटा संस ने मांग की है कि कोई भी शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी को बेच नहीं सकता है, इसे सरकार ने भी इसी महीने मंजूरी दे दी है। इसके चलते शापूरजी पालोनजी मिस्त्री की अरबों की संपत्ति कानूनी विवाद में फंस गई है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक टाटा संस में अपनी 18.4 पर्सेंट इक्विटी से मिस्त्री के पास 16.7 अरब डॉलर की पूंजी है। लेकिन, अब इस हिस्सेदारी को वह टाटा संस के बोर्ड की मंजूरी के बिना नहीं बेच सकते। टाटा संस के बोर्ड के साथ वह बीते दो साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

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