मजदूरी पर HC का फैसला श्रमिकों पर वित्तीय बोझ डालने वालाः केजरीवाल

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की तरफ से न्यूनतम मजदूरी को लेकर जारी अधिसूचना को खारिज कर देने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसपर अपनी नाखुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के इस फैसले से मजदूरों पर वित्तीय भार बढ़ेगा।

केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘एक साल से ज्यादा वक्त से दिहाड़ी मजदूर दिल्ली में हर महीने 9500 की जगह 13,500 रुपये मजदूरी पा रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से अचानक उनकी मजदूरी कम हो जाएगी। वे वित्ती बोझ के तले दब जाएंगे। यह उनके लिए बड़ा झटका है।’

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार द्वारा पिछले साल जारी की गई दो अधिसूचनाओं को खारिज कर दिया है। इनमें से एक सभी अधिसूचित रोजगार के लिए न्यूनतम मजदूर में बढ़ोतरी और दूसरा इस उद्देश्य के लिए एक अडवायजरी पैनल का गठन है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हाई कोर्ट के फैसले से स्व-रोजगार से जुड़े कुछ लोग मजदूरों को किया गया भुगतान की उगाही करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर यह होता है, तो यह गरीबों की तकलीफ को और बढ़ाएगा।’

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कमिटी के सुझाव और दिल्ली सरकार की अधिसूचना में महत्वपूर्ण पहलू पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। कोर्ट ने यह फैसला सोशल जूरिस्ट सहित विभिन्न लोगों द्वारा दायर पीआईएल के बाद आया है। सोशल जूरिस्ट ने अपनी याचिका में कहा था कि मजदूरी में वृद्धि बेहद कम और यह मजदूरों के जीवन जीने के अधिकार का हनन है।

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