MSP के नाम पर सरकार कर रही है किसानों के साथ धोखा, जानें गणित

एमएसपी मतलब वो दाम जिस पर सरकार किसान से माल खरीदेगी. आज सरकार ने धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) लागत का डेढ़ गुना करने का फैसला कियावो भी ए2+एफएल फॉर्मूले से जबकि किसान संगठन सी-2 फार्मूले की मांग कर रहें है.

क्या है ये फॉर्मूले –
ए2+एफएल फार्मूले के तहत फसल की लागत में जमीन की कीमत शामिल नहीं है
ए-2: कि‍सान की ओर से किया गया सभी तरह का भुगतान चाहे वो कैश में हो या कि‍सी वस्‍तु की शक्‍ल में, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च जोड़ा जाता है.
सी-2: लागत जानने का यह फार्मूला किसानों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इसमें उस जमीन की कीमत (इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कॉस्‍ट) भी जोड़ी जाती है जिसमें फसल उगाई गई. इसमें जमीन का कि‍राया व जमीन तथा खेतीबाड़ी के काम में लगी स्‍थाई पूंजी पर ब्‍याज को भी शामि‍ल कि‍या जाता है. इसमें कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है. यह लागत ए2+एफएल के ऊपर होती है.

किसान संगठनों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से डेढ़ गुना करने से बड़ी राहत होगी. लेकिन सवाल ये है कि लागत किस आधार पर तय हो. स्वामीनाथन आयोग ने भी सी-2 फार्मूले की सिफारिश की थी. टिकैत का मानना है “यदि सी-2 फार्मूले से सरकार एमएसपी तय करे तो यह कि‍सानों के लि‍ए फायदेमंद होगा. उसमें सरकार को कुछ बदलाव करने होंगे. टिकैत कहते हैं सरकार डेढ़ गुना लागत देने की बात कर रही है, लेकिन यह क्यों नहीं बता रही है कि आखिर फार्मूला कौन सा है. इससे जनता में भ्रम फैल रहा है. सरकार कह देगी कि हमने वादा पूरा किया और किसानों को फायदा मिलेगा ही नहीं.”

सरकार ने दांव चुनाव से ठीक पहले चला है क्योकि देश में 9.2 करोड़ किसान परिवार है जो 45 करोड़ वोटरों का प्रतिनिधित्व करते है. सरकार की दिक्कत ये है कि देशभर में जमीन की कीमत अलग अलग है. ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर किसी फसल की लागत कैसे तय हो पाएगी.

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