मुजफ्फरपुर कांड:9 माह पहले ही मिल गए थे भयावहता के संकेत, पर नहीं चेते

पिछले साल बिहार बाल अधिकार आयोग की तरफ से दी गई चेतावनी को अगर नजरअंदाज न किया गया होता तो आज बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में लड़कियों को जिस तरह के टॉर्चर का सामना करना पड़ा है वैसा उनके साथ नहीं होता।

पिछले साल नवंबर के महीने में राज्य बाल आधिकार संरक्षण आयोग (बीएससीपीसीआर) की अध्यक्ष डॉक्टर हरपाल कौर ने सेवा संकल्प एवम् विकास समिति की तरफ से संचालित इस बालिका गृह का दौरा करने इसमें गंभीर अनियमितताएं पायी थी।

कौर ने बताया- “हम उस तरह की उनकी बेचैनी को नहीं भांप पाए थे जो अब सामने रही है। लेकिन हमसे ज्यादा कुछ बताएं वे लड़कियां रो रही थी और इस केस में जो इस वक्त केयरटेकर वांछित है वह वहां मौजूद थी और उन लड़कियों को बोलने की इजाजत नहीं दे रही थी। वह बहुत ज्यादा दखल दे रही थी जिसके चलते हमें यह कहना पड़ा कि तुम चुप रहो, क्योंकि लड़कियां अपने आप को कैद में महसूस कर रही थी।”

कौर ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को सौंपी थी और समाज कल्याण विभाग ने लड़कियों को फौरन शिफ्ट करने की सिफारिश करते हुए उनके लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया था।

उन्होंने आगे कहा- “मैंने डीएम और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ भी बैठक की। लड़कियां काफी उत्पीड़ित नजर आ रही थी। हालांकि, उस समय उन लोगों ने यौन उत्पीड़न के बारे में कुछ भी नहीं बताया। हो सकता है उनके अंदर डर रहा होगा। उनकी हालत को देखकर मैंने पूछा था कि कैसे लड़कियां यहां पर चार महीने से ज्यादा रह जाती है और क्यों लड़कियों को उनके परिवारवालों से मिलाने का प्रयास नहीं किया जाता है।”

कौर ने कहा कि हमारी टीम ने सभी बाल एवं बालिका गृहों का दौरा किया। बीएससीपीसीआर एक मॉनिटरिंग एजेंसी है। हमने निरीक्षण करना शुरू किया था। अगर अधिकारी मुजफ्फरपुर बाल गृह को लेकर हमारी तरफ से उठाई गई चिंताओं पर गौर करते तो आज हालात बेहतर होते। यह मुद्दा हाल ही में दिल्ली में हुई राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बैठक में भी उठा था।

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