नागपंचमी के दिन यह डेढ़ घंटा है खास, पूजन से सफल होंगे सारे काम

नागदेवता की पूजा के लिए 15 अगस्त का ये डेढ़ घंटा बेहद खास है। यह वक्त है सुबह 7:24 बजे से 9:00 बजे तक का। पुरोहितों और ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इसी अवधि में नागदेव की पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त है। सही विधि से इस अवधि में की गई पूजा अत्यंत फलदायी होगी।

आचार्य शरद चन्द्र मिश्र ने बताया कि बुधवार को सूर्योदय 5:32 बजे होगा। सुबह 7:24 बजे तक चतुर्थी तिथि है। इसके बाद ही पंचमी तिथि लग रही है। सुबह 7:24 से 9 बजे तक नागपंचमी का अमृत योग है। सामान्यता मध्याह्न 12 बजे तक पूजा हो सकती है। उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की है। पंचमी तिथि के स्वामी नागदेवता है।

हस्त नक्षत्र पूर्व दिन से शुरू होकर रात 9:12 बजे तक रहेगी। इस दिन साध्य योग है। आनन्द नामक महाऔदायिक योग भी इसी दिन है। उन्होंने कहा कि नाग शक्ति के प्रतीक हैं। नागपंचमी के दिन अष्टकुल नागों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। उत्तर भारत में पर्वों की श्रृंख्ला नागपंचमी से शुरू होती है।

इस विधि से करें पूजन, धन धान्य से होंगे परिपूर्ण 
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय बताते हैं कि श्रावण शुक्ल पञ्चमी को नागपंचमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों के अनुसार बताया गया है। नागदेवता की पूजा गाय के दूध, धान के लावा, सफेद फूल और धूप से करनी चाहिए।

कालसर्प योग से मिल सकती है मुक्ति 
जिन जातकों की जन्म कुण्डली में कालसर्प दोष या सर्प श्राप के द्वारा कष्ट हो उन्हें भगवान शिव की पूजा के साथ- साथ सर्प देवता की पूजा विशेष मंत्रों से करनी चाहिए। इससे कालसर्प दोष और सर्प श्राप से मुक्ति मिल सकती है। पृथ्वी पर नागों की उत्पत्ति कैसे हुई इसका वर्णन हमारे ग्रन्थों में किया गया है। इनमें वासुकि, शेषनाग, तक्षक और कालिया जैसे नाग है। नागों का जन्म ऋषि कश्यप की दो पत्नियों कद्रु और विनता से हुआ था। स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन नागों की पूजा करने से सारी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं।

दरवाजे के दोनों ओर गोबर की आकृति का महत्व 
नागपंचमी के दिन अपने दरवाजे के दोनों ओर गोबर से सर्पों की आकृति बनानी चाहिए। धूप, फूल आदि से इसकी पूजा करनी चाहिए। इसके बाद इन्द्राणी देवी की पूजा करनी चाहिए। दही, दूध, अक्षत, जल, पुष्प, नेवैद्य आदि से उनकी आराधना करनी चाहिए। ऐसा करने से वर्ष भर आपके परिवार में सर्प देवता और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

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