माँ की मौत पर भी आँख से एक आंसू तक न निकला इस मशहूर अभिनेता का …नशे की हालत में था इतना टल्ली

नशा चाहे कोई भी हो हानिकारक ही होता है | नशे की लत किस तरह से इंसान को अन्दर ही अन्दर ख़त्म कर देती है उसे पता ही चलता वह बस नशे में डूबे रहना चाहता है और इस बात का पछतावा उसे बाद में ही होता है जब उसकी जिंदगी में कुछ नही बचता | आज हम आपको एक ऐसा ही उदाहरण बताने जा रहे है कि किस तरह बॉलीवुड के एक मशहूर अभिनेता की जिंदगी में नशे की वजह से भूचाल आया था |

जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे है बॉलीवुड ने जाने माने अभिनेता संजय दत्त की| बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें नशे की लत लग चुकी थी कॉलेज शुरू करते ही उन्हें ड्रग्स लेने ली आदत पड़ गयी थी उन्हें पढ़ाई का इतना शौक नहीं था लेकिन फिर भी वह अपने पापा के कारण कॉलेज जाया करते थे परन्तु वहा चरस, गंजा हर तरह की ड्रग्स लेते थे

जैसे ही इस बात का पता उनकी माँ नर्गिस को चला उन्हें अपने बेटे की बहुत टेंशन हो गयी और कुछ दिन तक तो उन्होंने ने संजय दत्त के पिता सुनील दत्त को इस बारे में कुछ नही बताया लेकिन जब संजय दत्त नहीं माने तो उन्होंने सुनील दत्त को सब कुछ बताया और सुनील दत्त ने संजय को रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा. उस दौरा मुंबई में रिहैबिलिटेशन सेंटर नहीं हुआ करते थे तो उन्हें अमेरिका भेजा गया था. यहाँ डॉक्टर ने उन्हें ड्रग्स की लिस्ट दी और कहा उसमे से जो जो ड्रग्स लेते हो उस पर निशान लगा दो. हैरानी की बात ये रही कि संजय ने सभी प्रकार के ड्रग्स पर निशान लगा दिए.

सुनील दत्त ने संजय की ये लत छुडवाने की हर तरह से कोशिश की | उन्होंने अपने बेटे को बिजी रखने के लिए उनकी पहली फिल्म ‘रॉकी’ बनाने में लग गए. लेकिन फिल्म की शूटिंग के दौरान भी संजय अधिकतर वक़्त ड्रग्स लेकर आ जाते थे. कई सीन को उन्होंने नशे की हालत में ही शूट कर दिए थे | लेकिन कुछ समय के बाद नर्गिस को कैंसर की समस्या हो गयी और उनकी हालत बिगडती गयी | नर्गिस को अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया जहाँ वे 3 मई 1981 को दुनियां को अलविदा कह गई.

उस समय भी संजय दत्त नशे में धुत्त थे जब नर्गिस की मौत हुयी और वह रोए तक नहीं बल्कि उन्होंने अपनी बहन से चरस मांग लिया था. इस पर उनकी बहन प्रिय दत्त बोली कि ‘चरस नहीं हैं बीडी चलेगी क्या?’ इस घटना के बाद सुनील बेटे संजय को इलाज के लिए जर्मनी और अमेरिका ले गए. यहाँ इलाज के बाद संजय को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो अपनी माँ के चले जाने के गम में चार दिनों तक रोते रहे. उन्हें लग रहा था कि माँ इसलिए छोड़ के चली गई क्योंकि वे उन्हें ठीक करना चाहती थी.

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