पाकिस्तान को मासूम समझ रहा था चीन, अब कर्ज मांग कर वसूल रहा है सूत

Chinese President Xi Jinping waits to welcome French Prime Minister Manuel Valls at the Great Hall of the People in Beijing January 30, 2015. REUTERS/Fred Dufour/Pool (CHINA - Tags: POLITICS) - RTR4NMGO

पाकिस्तान भयंकर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. चीन के साथ बेमेल दोस्ती की हकीकत अब जमीन पर आने लगी है. फाइनैंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने कहा है कि चीन उसे विदेशी मुद्रा की कमी से निपटने के लिए और कर्ज दे नहीं तो 60 अरब डॉलर की उसकी CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर) परियोजना खतरे में पड़ जाएगी।

फाइनैंशियल टाइम्स ने पाकिस्तान के सरकारी अधिकारियों के हवाले से लिखा है, पाकिस्तान ने जून 2018 के अंत में ही चीन से 4 अरब डॉलर का नया कर्ज लिया था और वह चाह रहा है कि चीन कर्ज देना जारी रखे जिससे कि उसे IMF से मदद की गुहार ना लगानी पड़े।

इस्लामाबाद के अधिकारियों ने अपने चीनी समकक्षों को चेतावनी दी है कि अगर वह कर्ज देना बंद कर देता है तो इससे चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का भविष्य खतरे में पड़ सकता है. सीपीईसी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का अहम हिस्सा है.

अधिकारियों का कहना है कि अगर पाकिस्तान को IMF की शरण लेने को मजबूर किया गया तो फिर उसे सीपीईसी परियोजना की फंडिंग की सारी जानकारी सार्वजनिक करनी पड़ेगी. यहां तक कि मूलभूत ढांचे को विकसित करने के लिए पहले से तय कुछ योजनाएं भी रद्द करनी पड़ सकती हैं.

पाकिस्तान के एक सरकारी अधिकारी ने फाइनैंशियल टाइम्स से बातचीत में बताया, चीन से हमारी विस्तार से बातचीत हुई है और हमने अपनी चिंता उनके साथ साझा की है. सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि एक बार अगर हम IMF कार्यक्रम में चले गए तो फिर हमें उन सभी शर्तों और नियमों की गोपनीय जानकारी बतानी पड़ेगी जिन पर चीन CPEC में निवेश करने को तैयार हुआ.

एक अन्य अधिकारी ने बताया, एक बार IMF की नजर CPEC पर पड़ गई तो वे जरूर यह पूछेंगे कि क्या पाकिस्तान मौजूदा आर्थिक हालात में इतना भारी-भरकम खर्च वहन कर सकता है?

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले 2 वर्षों में तेजी से गिरावट हुई है. आयात लगातार बढ़ रहा है और विदेशों में बसे पाकिस्तानियों ने डॉलर भेजना लगभग बंद कर दिया है जिससे पाक का खजाना लगभग खाली हो चुका है. पिछले कुछ महीनों से तेल की ऊंची कीमतों से आयात महंगा हुआ है जिससे संकट और भी गहरा गया है.

जून महीने की शुरुआत में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 10 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था जबकि पिछले साल इस समय विदेशी मुद्रा भंडार 16.1 बिलियन डॉलर था. पाक के पास अब दो महीनों के आयात के लिए भी पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार नहीं बचा है.

Facebook Comments