आज है World Population Day : ये है सबसे पुराना परिवार नियोजन प्रोग्राम, फिर भी हुआ फेल!

11 जुलाई को दुनिया भर में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है। इस बार भी पूरी दुनिया में बढ़ती हुई जनसंख्या को लेकर चिंता व्यक्त की गई और इसी के मद्देनजर इसे मनाया जा रहा है। इस साल विश्व जनसंख्या दिवस का थीम है ‘परिवार नियोजन एक मानव अधिकार है’। यहां परिवार नियोजन को मनावधिकार से जोड़ा गया है जोकि कुछ समय पहले तक एक सेहत संबंधी मुद्दा था।

हर साल 2.6 करोड़ नवजात जुड़ते हैं भारत की आबादी से

भारत की चर्चा करें तो यहां जनसंख्या पहले के मुकाबले अब और भी गंभीर मुद्दा बनकर उभरा है। भारत में जनसंख्या इस समय तक 125 करोड़ तक पहुंत गई है और ऐसा अनुमान है कि 2024 में ये आबादी चीन को भी पीछे पछाड़ देगी। 2001 की जनगणना के हिसाब से ये आबादी 121 करोड़ हुआ करती थी। 2011 की जनगणना कहती है कि हर साल भारत में 2.6 करोड़ नवजात भारत की जनसंख्या का हिस्सा बन जाते हैं। वहीं वर्ल्डमीटर की माने तो मौजूदा विश्व जनसंख्या 7.6 अरब हो गई है और इसमें हर दिन इजाफा हो रहा है। ये एक चिंताजनक स्थिति है।

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सबसे पुरानी परिवार नियोजन योजना, फिर भी ये हाल?

भारत की जनसंख्या विश्व में दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या है जोकि चीन (पहले पायजान पर है) जल्द ही पीछे छोड़ देगी। वो भी तब जब इस देश में परिवार नियोजन के लिए चलाए गए प्रोग्राम सन 1951 से चलाए जा रहे हैं। जोकि दुनिया के सबसे पुराने परिवार नियोजन प्रोग्राम्स में से एक है। जहां एक पूरी जनरेशन ‘हम दो हमारे दो’ के नारे के साथ आगे पैदा हुआ और सुनती आई, वो पूरी तरह से ना तो इसे समझ सकी और ना ही अपना पाई। आने वाले समय में ‘हम दो हमारे दो’ वाली जनसंख्या ही दुनिया की सबसे बड़ी आबादी के तौर पर जानी जाएगी।

क्या हो सकते हैं कारण?

इन सब के पीछे कारणों की चर्चा की जाए तो परिवार नियोजन प्रोग्राम लंबे समय से चलते आएं हैं और कई सरकारों ने इस पर जमकर काम भी किया है लेकिन इन सबके पीछे जो बड़े फेलियर के तौर पर देखा जाता वो है sterilisation। ये सबमें एक बड़ी समस्या के तौर पर देखा गया है। गर्भनिरोधन तरीकों की सही समझ, जानकारी और उपयोग की कमी ही बढ़ती जनसंख्या के मुख्य कारण के तौर पर देखी जाती है।

गर्भनिरोधन तकनीकों ने दिया पछाड़?

आंकड़ों की बात करें तो 53.3 प्रतिशत आबादी मार्डन गर्भनिरोधन के तरीकों को अपनाती है।  IUCD को 1.5 प्रतिशत आबादी, contraceptive pills को 4.1 प्रतिशत और condoms को 5.6 प्रतिशत जनसंख्या ही इस्तेमाल करती है। सिर्फ 36 प्रतिशत महिलाएं ही सही बन्धयकरण का इस्तेमाल करती हैं लेकिन पुरुष इसमें सबसे पीछे हैं। सिर्फ 0.3 प्रतिशत पुरुष ही बन्धयकरण का इस्तेमाल करते हैं। जोकि बताता है कि देश की महिलाओं के ऊपर ही परिवार नियोजन का सबसे ज्यादा बोझ है।

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लेकिन एक खुशी की एक किरण भी…

इन सबके बीच जो खुश करने वाली खबर है कि केरल में जनसंख्या को लेकर कुछ सुधार देखा गया है लेकिन उत्तर प्रदेश की स्थिति कापी चिंताजनक है। भारत में महिलाओं के बन्धयकरण में की जानी वाली लापरवाही और सबसे खतरनाक तकनीक होने की वजह से दिक्कतें आती है। लेकिन अब भारत में परिवार नियोजन के भार को महिलाओं के ऊपर डालने के बजाय पुरुषों पर भी डाला जाए इसको लेकर चर्चा होने लगी है।

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