पटना में शेल्टर होम की दो लड़कियों की मौत, दो हिरासत में

पटना के एक शेल्टर होम की दो लड़कियों की मौत ही गयी है। दोनों लड़कियों की शनिवार शाम तबीयत काफी बिगड़ गयी। अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गयी। हालांकि उनकी मौत को संदिग्ध बताया जा रहा है। मुजफ्फरपुर और अन्य अल्पावास गृहों की जांच के बीच दो संवासिनों (लड़कियों) की मौत से सनसनी फैल गयी है। घटना की जांच के लिए डीएम कुमार रवि और एसएसपी मनु महाराज पहुंच गए हैं।हिरासत में ली गयी एक महिला से पूछताछ हो रही है। पीएमसीएच प्रशासन के अनुसार, बेबी कुमारी दोनों संवासिनों को लेकर आयीं थीं। भर्ती रशीद पर इसी का नाम है।

आसरा गृह में रहती थीं लड़कियां :

दोनों संवासिनें राजीवनगर स्थित “आसरा गृह” में रहती थीं। कल शाम को 17 वर्षीय पूनम और 35 वर्षीय बबली को पीएमसीएच लाया गया था। पीएमसीएच अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि दोनों संवासिनों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। बताया जा रहा है कि एक को फेफड़े में संक्रमण था, वहीं दूसरे को बुखार-पेट दर्द की परेशानी थी।

मामले में यह बात सामने आई है कि आसरा गृह की ओर से जान बूझ कर लापरवाही बरती गई। पहले से ही दोनों लड़कियों की तबीयत खराब थी, लेकिन उनका इलाज नहीं कराया जा रहा था। उन्हें आसरा गृह के अलग कमरे में बंद करके रखा गया था।

पुलिस को नहीं दी जानकारी : आसरा गृह में दो संवासिनों की तबीयत खराब है इसकी जानकारी जिला बाल संरक्षक इकाई के सहायक निदेशक दिलीप कामत को थी, लेकिन उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी। बताया जा रहा है कि दिलीप कामत शुक्रवार को इस आसरा गृह की जांच को गए थे। शनिवार को वे दोबारा आसरा गृह पहुंचे और लड़कियों की गिनती की। तभी उन्हें इन दोनों संवासिनों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिली। ये सब जानने के बाद भी दिलीप कामत ने पुलिस को जानकारी नहीं दी। यह भी बात सामने आ रही है कि दो तीन पहले इसी आसरा गृह की और  एक-दो संवासिनों की मौत हुई है लेकिन उसे छुपा कर रखा गया है।

राजीवनगर स्थित इस आसरा गृह में 75 संवासिनों को रखा गया है। इनमें 12 को छोड़ सभी मानसिक रूप से विक्षिप्त संवासिनें हैं। सवाल उठता है कि स्वस्थ लड़कियों को यहां क्यों रखा गया है। इस आसरा गृह से ही दो दिन पहले चार लड़कियों ने ग्रिल काटकर भागने का प्रयास किया था। हालांकि उन्हें पकड़ लिया गया था। इस आसरा गृह को इसी साल 1 मई को खोला गया था। इसके मुख्य कर्ता धर्ता में मनीषा दयाल है। आसरा गृह में कई जिलों से लाकर लड़कियों को रखा गया है।

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