‘कश्मीर-ए-हिन्द’ नफरत के बीच कश्मीर की तस्वीर को दिखाती ये कविता- सौरव सिंह

कश्मीर -ए-हिन्द में जा उन सरहदों पर ,
खून की स्याही से किताबे वो लिखते है ,
वादियों की खूबसूरती में,
आतंक से आए दिन चिराग कई बुझते है ,
ए-खुदा-जन्नत ऐसी है अगर जहन्नम में  मुझे भेज दे,
ऐसा फकीरे-ए- बन्दे तेरे कहते है ।
चप्पे-चप्पे पे सैनिको के पहरे ,
नन्हे भविष्य जहाँ गहरे अंधेरो में ठहरे ,
कोई चन्दन की महक उनके जिंदादिलो में फैलाओ तो सही ,
प्रण ये लो आज जन्म से ,
हाथों से हाथ मिलकर चलेंगे ,
मुर्दे भी उठकर के ये बोलेंगे ,
चूल्हे की राख से धर्म की बेड़िया को जलाकर साथ हम भी चलेंगे।

By- Saurav Singh

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